नई दिल्‍ली, जेएनएन। Community Health Workers In Rural India कोविड महामारी के खिलाफ लड़ाई में अगर दुनिया के कई हिस्सों में हमें बढ़त मिलती दिखाई दे रही है तो उसका पूरा श्रेय जाता है सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को। अमेरिका स्थित गैर लाभकारी संस्था ओर्ब मीडिया की हालिया रिसर्च यही तस्वीर पेश कर रही है। रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता इस महामारी से सबको समान इलाज मुहैया कराने में मदद कर रहे हैं। मुश्किल समय में ये लोग पूरे समर्पण के साथ अपनी भूमिका निभा रहे हैं।

रिपोर्ट बताती है कि सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के काम करने के तरीके, घनी आबादी तक उनकी पहुंच और स्थानीय समुदायों की बारीक समझ का इस्तेमाल किया जाए तो कोरोना जैसी महामारी से निपटना अधिक आसान हो सकता है। रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि उन्हें अच्छी तरह से प्रशिक्षित किया जाए और अच्छा मुआवजा दिया जाए तो इसके सकारात्मक परिणाम हो सकते हैं।

सामुदायिक स्वास्थ्य वर्कर की बदौलत कम हुई: दुनिया के सात देशों में बाल मृत्यु दर ओर्ब मीडिया ने 160 देशों की बाल मृत्यु दर के राष्ट्रीय आंकड़ों का अध्ययन किया। उन्होंने स्वास्थ्य सुविधाओं पर होने वाले खर्च और औपचारिक रूप से प्रमाणित स्वास्थ्य कर्मचारियों की संख्या जैसे कारकों के आधार पर एक सांख्यकीय मॉडल विकसित किया, जिससे एक देश की वास्तविक बाल मृत्यु दर और उसकी अपेक्षित बाल मृत्यु दर से तुलना की जा सके। इन आंकड़ों के विश्लेषण के बाद, उन्होंने सात देशों को चुना, जिनके परिणाम चौंकाने वाले थे।

इन देशों में थाइलैंड, अर्जेंटीना, हंगरी, मेक्सिको, बांग्लादेश, होंडुरास और चिली शामिल हैं। इन देशों ने समय के साथ सफलतापूर्वक अपनी बाल मृत्यु दर को कम किया। बच्चों को अच्छा स्वास्थ्य देने में इन देशों ने सीमित फंडिंग, ग्रामीण और शहरी समुदायों में विभन्नाताओं सहित कई चुनौतियों का सामना किया। इनमें हंगरी में विषाणुजनित जेनोफोबिया, बांग्लादेश में स्वास्थ्य पेशेवरों का र्धािमक संशय, मेक्सिको में अपने ही देश के लोगों के बीच भाषाई मुद्दे जैसी चुनौतियां शामिल हैं।

बाल मृत्यु दर को कम करने की अपनाई रणनीति: इस अध्ययन में सातों देशों में से प्रत्येक ने अपने बाल मृत्यु दर संकट से निपटने के लिए कई रणनीतियों को एक साथ काम में लिया। इन सब में एक चीज समान थी, उन्होंने सामुदायिक स्तर पर विभिन्न स्तर के स्वास्थ्य मुद्दों से निपटने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को तैनात किया। उदाहरण के तौर पर हंगरी में सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता बच्चों व उनकी माताओं के बीच कुपोषण को दूर करने में लगे हुए थे। चिली में वे माताओं को यह सिखा रहे थे, कि उनके नवजात शिशु की देखभाल कैसे की जाए। जबकि थाइलैंड में उन्होंने आर्पूति का वितरण किया और जागरूकता अभियानों में लगे।

ये हैं सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता: स्थानीय समुदायों के वे लोग हैं, जो महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार, गैर-लाभकारी संगठनों या एनजीओ के साथ काम करते हैं। इनके लक्ष्य, प्रशिक्षण और काम करने के तौर- तरीके अलग-अलग हो सकते हैं। अपनी बहुमुखी प्रतिभा से वे कम समय में स्वास्थ्य क्षेत्र की महत्वपूर्ण जरूरतों को पूरा कर सकते हैं और घनी आबादी तक पहुंच सकते हैं।

इसलिए हैं अहम: सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता जहां सेवा देते हैं, उसी समुदाय से होते हैं। इस कारण उनके पास व्यक्ति की समस्या को समझने की क्षमता होती है। इसके परिणामस्वरूप वे उन लोगों के विचारों को समझने और उन्हें समझाने में भी काफी सक्षम होते हैं।

मिले उचित मुआवजा और बेहतर प्रशिक्षण: रिपोर्ट बताती है कि अगर इन कार्यकर्ताओं को अच्छी तरह से प्रशिक्षित किया जाए, अच्छा मुआवजा दिया जाए और वे एक विशिष्ट कार्य हेतु लंबी अवधि के लिए प्रतिबद्ध हों, तो वे समग्र स्वास्थ्य में सकारात्मक बदलाव लाने की विशाल क्षमता रखते हैं। अगर ये शर्तें पूरी होती हैं, तो वे कोरोना वायरस महामारी से निपटने जैसी स्थितियों में अमूल्य योगदान दे सकते हैं।

डिस्कलेमर: यह डाटा और शोध पूरी तरह से ओर्ब मीडिया द्वारा किया गया है। दैनिक जागरण ने डाटा और शोध को ओर्ब मीडिया द्वारा दिए गए तथ्यों के आधार पर ही पेश किया है।

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