नई दिल्ली, अरविंद पांडेय। आने वाली पीढ़ी अकेले नौकरी के ही भरोसे न रहे, इसके लिए बच्चों में अब 11-12 साल की उम्र से ही व्यवसाय के बीज रोपे जाएंगे। सरकार ने स्कूलों में इसको लागू करने की एक बड़ी योजना तैयार की है। इसके तहत बच्चों को छठवीं से ही व्यवसायिक शिक्षा दी जाएगी। इस दौरान इसका कोर्स बिल्कुल ऐसा होगा, ताकि बच्चों में इस दिशा मे आगे बढ़ने को लेकर रुचि पैदा हो सके। अभी स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा की पढ़ाई नौवीं क्लास से दी जाती है।

योजना के तहत केंद्रीय विद्यालयों में इसकी पढ़ाई इसी सत्र से शुरू की जा सकती है। हालांकि इसको लेकर अभी एनसीईआरटी और मंत्रालय के बीच अंतिम दौर की चर्चा होनी बाकी है। योजना के तहत व्यवसायिक कोर्स को छठवीं से लागू करने के पीछे जो तर्क है कि नौवीं तक आते-आते ज्यादातर बच्चे अपनी पढ़ाई और आगे के क्षेत्र को लेकर मानसिक रूप से तैयार हो चुके होते है। बाद में वह उसी दिशा में आगे बढ़ जाते है। इसके चलते व्यावसायिक शिक्षा का उन पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ पाता है।

सूत्रों की मानें तो एनसीईआरटी ने इन पहलुओं को देखते हुए बच्चों को अब छठवीं से ही इसकी पढ़ाई कराने की योजना बनाई है। योजना के तहत बच्चों को इस दौरान सिर्फ इस विषय की प्रारम्भिक जानकारी दी जाएगी। ताकि उनके व्यावसायिक क्षेत्र में बढ़ने का रूझान पैदा हो सके। एनसीईआरटी इसके तहत छठवीं से आठवीं तक के लिए एक नया पाठ्यक्रम डिजाइन करने में जुटा है।

गौरतलब है कि सरकार का फोकस इन दिनों युवाओं को पढ़ाई के बाद स्टार्टअप जैसे कारोबार से जोड़ने को लेकर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कई बार युवाओं को कह चुके है, कि वह नौकरी करने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बने।

By Tilak Raj