नई दिल्ली, जेएनएन। भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर लंबे समय से जारी सैन्य गतिरोध का हल निकालने के लिए बातचीत बीते दो महीने से आगे नहीं बढ़ पा रही है। एलएसी की अग्रिम चोटियों पर जबर्दस्त ठंड और बर्फबारी के इस कठिन मौसम में बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती की चुनौती के बावजूद बातचीत आगे नहीं बढ़ पाने की वजह चीन का अडि़यल रुख है। बैक चैनल संवादों के बावजूद वार्ता की मेज पर आने को लेकर दोनों देशों के मतभेद कायम हैं। इसके मद्देनजर ही भारत और चीन दोनों की ओर से मौजूदा सैन्य गतिरोध के समाधान की वार्ता को लेकर रणनीतिक चुप्पी बरती जा रही है।

पूर्वस्थिति की बहाली ही रास्‍ता 

भारत ने बार-बार साफ किया है कि एलएसी पर बीते साल अप्रैल की पूर्वस्थिति की बहाली के साथ एलएसी की गरिमा का दोनों पक्षों की ओर से सम्मान किया जाना ही गतिरोध के हल का रास्ता है। जबकि चीन पहले पूर्वी लद्दाख के दक्षिणी पैंगोंग त्सो झील की अग्रिम चोटियों से भारत को अपने सैनिकों को हटाने का दबाव बना रहा है। एलएसी के मौजूदा गतिरोध का हल निकालने के लिए भारत अपने सैनिकों की इस क्षेत्र में मजबूत रणनीतिक तैनाती को किसी सूरत में ढीला करने को तैयार नहीं है।

अगली तारीख पर फैसला नहीं 

जानकार सूत्रों का कहना है कि इन्हीं मतभेदों की वजह से सैन्य कोर कमांडर स्तर की वार्ता की अगली तारीख पर दोनों देश कोई फैसला नहीं कर पा रहे हैं। कमांडर स्तर की पिछली बैठक बीते छह नवंबर को हुई थी। एलएसी पर टकराव की स्थिति में तैनात सैनिकों को पीछे हटाने के दूसरे चरण का निर्णय कमांडर स्तर की वार्ता पर ही निर्भर है। 

-40 डिग्री में भी डटे रहेंगे जवान 

ऐसे में वार्ता की धीमी प्रगति से साफ है कि भारी बर्फबारी के बीच व माइनस 40 डिग्री से भी नीचे के तापमान में तैनात सैनिकों को हाल-फिलहाल पीछे हटाए जाने की गुंजाइश नहीं है। भारत और चीन के बीच सीमा समन्वय मामलों से जुड़े कार्य समूह की बीते 18 दिसंबर को हुई बैठक में कमांडर स्तर की अगले दौर की वार्ता करने पर हामी भरी गई। लेकिन इसके बाद भी दोनों पक्षों के बीच वार्ता की तारीखों पर अभी तक कोई फैसला नहीं हो पाया है। जाहिर तौर पर कमांडर स्तर की वार्ता की गाड़ी तभी आगे बढ़ेगी जब चीन अपने अडि़यल रुख में नरमी लाएगा।