विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

तमिलनाडु: कोयंबटूर बम धमाकों के दोषियों के पेरोल पर BJP ने विजय सरकार को घेरा, बोली- पीड़ितों के साथ धोखा

Published: Tue, 20 Oct 2026 08:39 PM (IST)

तमिलनाडु सरकार ने 1998 के कोयंबटूर बम धमाकों के अल-उम्मा दोषियों को 60 दिन की पैरोल दी है। भाजपा ने ...और पढ़ें

1998 कोयंबटूर विस्फोटों के दोषियों को विजय सरकार ने दी पेरोल तो भड़की बीजेपी (स्क्रीनग्रैब- सोशल मीडिया)

1998 कोयंबटूर विस्फोटों के दोषियों को विजय सरकार ने दी पेरोल तो भड़की बीजेपी (स्क्रीनग्रैब- सोशल मीडिया)

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

डिजिटल डेस्क, कोयंबटूर। मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार ने 1998 के कोयंबटूर सिलसिलेवार बम धमाकों के दोषी अल-उम्मा आतंकवादियों को दी गई 60 दिनों की पैरोल की अनुमति दी है। विजय सरकार के इस फैसला का तमिलनाडु बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष नारायणन तिरुपति ने कड़ा ऐतराज जताया है।

तिरुपति ने जोर देकर कहा कि 58 पीड़ितों के न्याय और जनता की सुरक्षा से राजनीतिक नफे-नुकसान के लिए समझौता नहीं किया जा सकता, इसलिए दोषियों को अपनी पूरी सजा भुगतनी ही होगी।

भाजपा ने की फैसला वापस लेने की मांग

भाजपा ने इसे दोषी आतंकवादियों के प्रति चुनिंदा नरमी करार दिया और कहा कि यह उन लोगों का अपमान है जिनकी जान गई, और उन लोगों के साथ धोखा है जो इस घटना में बच गए। BJP ने इस फैसले को वापस लेने की मांग की है।

हालांकि, अधिकारियों ने पैरोल के लिए निजी कारणों और स्वास्थ्य स्थितियों का हवाला दिया है, साथ ही यह भी कहा कि ये दोषी पहले ही 25-30 साल जेल में बिता चुके हैं। BJP का तर्क है कि ये कारण न तो पर्याप्त हैं और न ही अपराध की गंभीरता के हिसाब से उचित हैं।

दरअसल, तमिलनाडु सरकार ने जिन मोहम्मद अंसारी, मोहम्मद अली, मोनाप्पा उर्फ मोहम्मद हसन, मोहम्मद अजम और नवाब खान को जेल से 60 दिन की पैरोल दी है, यह सभी उन धमाकों के दोषी हैं, जिनमें भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी की 1998 में कोयंबटूर में होने वाली रैली से पहले 58 लोगों की मौत हो गई थी और 250 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। ये लोग प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन 'अल-उम्मा' से जुड़े थे।

क्या बोली बीजेपी?

तमिलनाडु भाजपा के उपाध्यक्ष नारायणन तिरुपति ने एक्स पर लिखा, 'निजी कारणों को एक ऐसे आतंकी हमले की गंभीरता से ऊपर नहीं रखा जा सकता, जो राज्य के इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक है।'

उन्होंने आगे कहा, 'एक चुनावी रैली से ठीक पहले प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन 'अल-उम्मा' द्वारा किए गए ये विस्फोट, आम नागरिकों की बड़े पैमाने पर हत्या करने की एक सोची-समझी साजिश थी। सुप्रीम कोर्ट ने खुद इस अपराध को 'जघन्य' करार दिया है और दोषियों को जमानत देने से इनकार किया है।'

भाजपा नेता ने जोर देकर कहा कि जिन दोषियों ने बम लगाने में मदद की और जिनकी वजह से कई परिवार तबाह हो गए, उन्हें पैरोल देना मृतकों का अपमान और जीवित लोगों के साथ धोखा है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस कदम से राज्य की जनता के बीच यह गलत संदेश जाता है कि समाज के खिलाफ जंग छेड़ने वालों के साथ नरमी बरती जा सकती है।