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राहुल के साथ कॉफी, PM मोदी संग मेट्रो की सवारी; विजय का सियासी संतुलन या कोई बड़ा दांव?

Published: Sun, 11 Oct 2026 10:25 PM (IST)

राहुल गांधी के साथ कॉफी पीने के बाद, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ मेट्रो की सवारी की, जिससे उनके राजनीतिक संतुलन साधने के प्रयास स्पष्ट हुए।

PM मोदी संग सीएम विजय ने मेट्रो की सवारी की। (एएनआई)

PM मोदी संग सीएम विजय ने मेट्रो की सवारी की। (एएनआई)

HighLights

  1. विजय ने राहुल गांधी और पीएम मोदी से मुलाकात कर संतुलन साधा।

  2. तमिलनाडु सीएम ने केंद्र और सहयोगियों से संबंध बनाए।

  3. TVK की 'विजय को पीएम बनाओ' मांग ने राष्ट्रीय बहस छेड़ी।

डिजिटल डेस्क, चेन्नई। एक कैफे में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ कॉफी पीने के अगले ही दिन, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से साथ मेट्री की सवारी की और मंदिर के दर्शन किए। इससे उनके मुख्य सहयोगी और केंद्र में बीजेपी की सरकार से बीच राजनीतिक संतुलन बनाने की उनकी कोशिश साफ दिखी।

चेन्नई मेट्रो रेस फेज-2 को हरी झंडी दिखाने आए पीएम मोदी के साथ विजय ने मेट्रो की सवारी की और IIT मद्रास कैंपस में बने मंदिर के दर्शन किए। प्रधानमंत्री मोदी लगभग 13,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करने चेन्नई आए थे।

टीवीके की तरफ से 'विजय को पीएम बनाओ' की मांग

ये अलग-अलग तरह की मुलाकातें ऐसे समय में हो रही हैं जब टीवीके की तरफ से 'विजय को पीएम बनाओ' की मांग उठ रही है और उनकी बढ़ती राष्ट्रीय महत्वकांक्षाओं से कांग्रेस असहज महसूस कर रही है।

टीवीके सरकार का समर्थन करने वाली कांग्रेस, 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद के लिए उम्मीदवार को तौर पर पेश कर रही है। राहुल के साथ विजय की लंच और कॉफी वाली मुलाकात का मकसद शायद इन अटकलों को दूर करना था कि सहयोगियों के बीच सबकुछ ठीक नहीं है।

'विजय को पीएम बनाओ' का नारा कार्यकर्ताओं की इच्छा- टीवीके

हालांकि टीवीके का कहना है कि 'विजय को पीएम बनाओ' का नारा कुछ कार्यकर्ताओं की इच्छा है, न कि पार्टी का आधिकारिक रुख, लेकिन कुछ मंत्रियों ने सार्वजनिक रूप से पूछा है कि भारत की विकास यात्रा का इंजन रहा तमिलनाडु प्रधानमंत्री क्यों नहीं दे सकता।

विजय ने खुद भी बड़ी राष्ट्रीय भूमिका निभाने की संभावना से इनकार नहीं किया है।

साथ ही, विजय ने बीजेपी को अपनी पार्टी का वैचारिक दुश्मन बताया है। लेकिन मुख्यमंत्री के तौर पर उन्हें फंड, योजनाओं और निवेश के मामले में केंद्र सरकार के साथ काम करना पड़ता है। उनकी सरकार ने केंद्र के साथ अपने रिश्तों को सीधे तौर पर दुश्मनी वाला दिखाने से परहेज किया है।