नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। कांग्रेस की चुनावी थाली में विपक्ष ने कोयला झोंक दिया। कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़ी फाइलों के गायब होने के मुद्दे पर लोकसभा और राज्यसभा में भाजपा ने प्रधानमंत्री पर जोरदार हमला बोला। इस शोरशराबे में राजीव गांधी के जन्मदिन पर खाद्य सुरक्षा विधेयक को लोकसभा से पारित कराने की सरकारी तैयारियों पर पानी फिर गया।

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प्रधानमंत्री के जवाब पर विपक्ष के हंगामे के बाद मंगलवार को दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। टकराव अभी भी टला नहीं है। लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने इस मसले पर प्रधानमंत्री से सदन में आकर बयान देने की मांग की।

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वहीं, संसदीय कार्यमंत्री कमलनाथ और राजीव शुक्ला ने साफ कहा कि बयान प्रधानमंत्री नहीं कोयला मंत्री देंगे।

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कांग्रेस के करीबियों को आवंटित कोयला ब्लॉक से जुड़ी 147 फाइलें गायब होने के मुद्दे पर मंगलवार को दोनों सदन नहीं चल सके। सरकार चाहती थी कि उसका सबसे बड़ा सियासी ट्रंप कार्ड खाद्य सुरक्षा विधेयक राजीव गांधी के जन्मदिन पर लोकसभा से पारित हो जाए, लेकिन भाजपा ने गायब फाइलों के मुद्दे पर जोरदार हंगामा कर कांग्रेस की कोशिशों पर पानी फेर दिया। लोकसभा में तो सुषमा स्वराज ने पीएम पर धावा ही बोल दिया।

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उन्होंने कहा कि ब्लॉक आवंटन में पहले सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पेश रिपोर्ट में फेरबदल हुआ था, जिसमें कानून मंत्री को कुर्सी गंवानी पड़ी। अब जब सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि सीबीआइ को सभी फाइलें दी जाएं तब इससे जुड़ी कई फाइलें गुम हैं। इन गायब फाइलों से कोई न कोई कांग्रेस नेता जुड़ा हुआ है। प्रधानमंत्री के बयान की मांग को संसदीय कार्यमंत्री ने नकारते हुए कोयला मंत्री जायसवाल के बयान की बात कही, लेकिन विपक्ष नही माना।

राज्यसभा में कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने हंगामे और टोका-टाकी के बीच बयान पढ़ा, जिसे खारिज कर विपक्ष पीएम के बयान पर अड़ गया। इस बीच जायसवाल और जेटली के बीच तीखी झड़प भी हुई। जायसवाल बार-बार 2004 तक की फाइलें गायब होने की बात दोहरा रहे थे। तब जेटली ने पूछा, 'क्या मंत्री बताएंगे कि 2004 के बाद की कोई फाइल गायब नहीं है?' जेटली ने यह भी कहा कि ऐसी रिपोर्ट हैं कि जो कोयला ब्लॉक आवंटित हुए हैं, उनकी मंत्री से नजदीकी है। ऐसे में फाइलें गायब हो जाती हैं तो ये मंत्री क्या जवाब देंगे।' वरिष्ठ भाजपा नेता नजमा हेपतुल्ला ने अपने उपसभापति रहते एक घटना का हवाला दिया, जिसमें पीएम को जवाब देना पड़ा था। माकपा नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि सदन जानना चाहता है कि फाइलें कैसे गायब हुई। तब कोयला मंत्रालय प्रधानमंत्री के अधीन था। लिहाजा जवाब पीएम को ही देना होगा।

किसने, क्या कहा

'चूंकि प्रधानमंत्री के पास कोयला मंत्रालय रहा था, इसलिए संबंधित व्यक्ति प्रधानमंत्री हैं। पीएम पूर्व में इस बारे में सदन को आश्वस्त कर चुके हैं, लेकिन फाइलें गायब हैं। इसलिए, वह सदन को बताएं कि फाइलें कहां और कैसे गायब हुई। अब कैसे वापस आएंगी?'

-सुषमा स्वराज, लोकसभा सदस्य

'फाइलें गायब नहीं होती, उन्हें गायब कराया जाता है। क्या श्रीप्रकाश जायसवाल बताएंगे कि किस-किस कंपनी से जुड़ी फाइलें गायब हैं और उनमें किन लोगों का फायदा हुआ है। क्या कोयला मंत्रालय ने फाइलें गायब होने पर कोई एफआइआर दर्ज कराई?'

-अरुण जेटली, राज्यसभा सदस्य

'मुझ पर जो आरोप लगाए गए हैं वे मिथ्या हैं। अगर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर वे मेरे खिलाफ सिद्ध होते हैं तो कोई भी सजा भुगतने को तैयार हूं। अगर आरोप साबित नहीं होते हैं, तो नेता विपक्ष अपने लिए क्या हर्जाना देंगे?'

-श्रीप्रकाश जायसवाल, कोयला मंत्री

'हमने कोयला मंत्रालय को घोटाले में दर्ज 13 एफआइआर से जुड़े दस्तावेजों के लिए मई, 2013 में पत्र लिखा था। हमें अब तक मंत्रालय के जवाब का इंतजार है।'

-रंजीत सिन्हा, सीबीआइ निदेशक

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