गुजरात के भरुच जामा मस्जिद का जैन विहार होने का दावा, हाई कोर्ट में याचिका दायर
गुजरात के भरुच में स्थित ऐतिहासिक जामा मस्जिद के जैन विहार होने के दावे और जैन श्रद्धालुओं को पूजा की ...और पढ़ें

गुजरात के भरुच जामा मस्जिद का जैन विहार होने का दावा (फोटो- जागरण)
HighLights
जैन श्रद्धालुओं को पूजा की मंजूरी देने की मांग के साथ हाई कोर्ट में याचिका दायर
एएसआइ और अन्य पक्ष 13 अक्टूबर को हाई कोर्ट में दाखिल करेंगे अपना जवाब
शत्रुघ्न शर्मा, अहमदाबाद। गुजरात के भरुच में स्थित ऐतिहासिक जामा मस्जिद के जैन विहार होने के दावे और जैन श्रद्धालुओं को पूजा की मंजूरी देने की मांग के साथ हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है।
हाई कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) से मस्जिद में जैन तीर्थंकर की प्रतिमा के दावे पर रिपोर्ट मांगी है।
चर्चित वकील हरीशंकर जैन ने कोर्ट को बताया कि ऐतिहासिक जामा मस्जिद जो भारतीय पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है, उसके तहखाने में जैन धर्म के 17वें तीर्थंकर मल्लिनाथ व अन्य देवताओं की प्रतिमाओं के अवशेष मौजूद हैं।
उन्होंने बताया कि जैन समाज के लोगों को यहां जाने व पूजा करने की मंजूरी दी जानी चाहिए।हाई कोर्ट ने एएसआइ के विशेषज्ञों को इसकी जांच के आदेश दिए हैं। उसने याचिकाकर्ता के दावों को लेकर एक रिपोर्ट मांगी है।
याचिकाकर्ताओं ने अल्लाउद्दीन खिलजी के हमले के इतिहास की जानकारी के साथ अपने दावे की पुष्टि का प्रयास किया है। याचिकाकर्ता हरिशंकर जैन, राहुल दीवान समेत पांच लोगों की ओर से याचिका दायर की गई है।
हाई कोर्ट ने एएसआई व राज्य सरकार से आगामी 13 अक्टूबर को जवाब पेश करने को कहा है। भोजशाला केस के निर्णय के आधार पर याचिकाकर्ता ने भरुच जामा मस्जिद पर दावा पेश किया। 1909 के गजट में पहली बार इसे जामा मस्जिद बताने की जानकारी दी गई।
राज्य सरकार ने कहा कि एएसआइ को कानून व्यवस्था बनाए रखने तथा प्रतिमाओं के अवशेष की सुरक्षा के लिए व्यवस्था चाहिए तो सरकार उसके लिए तैयार है। बताया जा रहा है कि एएसआइ ने भी यहां मूर्ति होने की बात को स्वीकार किया है।
