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'मेट्रो और इंटरनेट सेवा बहाल हो, बैरिकेड्स हटाए जाएं...'; सुप्रीम कोर्ट के आदेश की बड़ी बातें

Published: Sun, 11 Oct 2026 01:43 PM (IST)Updated: Sun, 11 Oct 2026 02:38 PM (IST)

आज सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले हुई पुलिस कार्रवाई पर विशेष सुनवाई की। इस ...और पढ़ें

सुप्रीम कोर्ट के फैसले की बड़ी बातें।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले की बड़ी बातें।

HighLights

  1. शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को अवैध हिरासत में न लिया जाए।

  2. दिल्ली मेट्रो और रेलवे सेवाएं सामान्य रूप से चालू रहें।

  3. कानून-व्यवस्था की स्थिति में ही बैरिकेड्स लगाए जाएं।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन से ठीक पहले हुए सरकारी एक्शन और पुलिस कार्रवाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को एक विशेष सुनवाई की।

इस दौरान कोर्ट ने प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं कि शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा होने वाले लोगों को अवैध रूप से हिरासत में न लिया जाए और राजधानी में मेट्रो व रेल सेवाएं सामान्य रूप से चालू रखी जाएं।

अब सवाल है कि आज के विशेष सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने कौन-कौन से आदेश दिए, दिल्ली पुलिस को क्या कहा और किस-किस को नोटिस भेजा? आइए जानते हैं।  

पहले जानिए कोर्ट के मुख्य और बड़े आदेश के बारे में

बता दें कि जस्टिस जयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने 9 अक्टूबर के अपने आदेश के कथित उल्लंघन और 10 अक्टूबर को दिल्ली में बड़ी संख्या में लोगों को अवैध रूप से हिरासत में लिए जाने के मामलों पर तत्काल सुनवाई करते हुए कई अहम आदेश दिए।

शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की अवैध हिरासत पर रोक- कोर्ट ने प्रशासन को कड़ा निर्देश दिया है कि जो लोग शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा हो रहे हैं, उन्हें अवैध रूप से हिरासत में (detain) न लिया जाए।

मेट्रो और रेलवे सेवाओं की बहाली- अदालत ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया कि दिल्ली मेट्रो अपने सामान्य शेड्यूल के मुताबिक चले और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था सुचारू रूप से काम करे।

बैरिकेड्स हटाने के निर्देश- कोर्ट ने कहा कि जब तक कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर "बेहद जरूरी" (absolutely warranted) न हो, शहर से सभी बैरिकेड्स हटा दिए जाने चाहिए ताकि आम लोगों की आवाजाही सामान्य हो सके।

इंटरनेट सेवाएं बाधित न हों- अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखते हुए इंटरनेट सेवाएं बाधित नहीं की जानी चाहिए।

पेशेवर कर्तव्यों में बाधा न आए- कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि वकीलों, पत्रकारों और अन्य पेशेवरों को उनके पेशेवर कर्तव्यों (प्रोफेशनल ड्यूटी) के निर्वहन से बिल्कुल न रोका जाए।

प्रदर्शन का दायरा- अदालत ने यह भी साफ किया कि नागरिकों को विरोध प्रदर्शन करने का पूरा अधिकार है, लेकिन यह प्रक्रिया 'पुलिस एक्ट' और कानून के दायरे में ही होनी चाहिए।

किस-किस को भेजा गया नोटिस?

इसके साथ ही सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में केंद्रीय गृह सचिव, दिल्ली पुलिस कमिश्नर और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) के अध्यक्ष को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

वकीलों की दलीलें और विरोध

गौरतलब है कि सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकीलों ने अदालत को बताया कि आदेशों का घोर उल्लंघन किया गया है। मेट्रो सेवाएं ठप थीं, नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन बंद कर दिए गए थे।

इसके अलावा, कोई ट्रैफिक एडवाइजरी जारी किए बिना बड़ी संख्या में लोगों को अनावश्यक परेशान किया गया और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के दायरे से बाहर के इलाकों से भी लोगों को हिरासत में लिया गया।

केंद्र सरकार और सॉलिसिटर जनरल का पक्ष भी जानिए

वहीं केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रशासन की कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि 10 अक्टूबर को दिल्ली मेट्रो के कुल 303 स्टेशनों में से केवल 45 स्टेशनों पर ही प्रवेश और निकास को प्रतिबंधित किया गया था।