'अगर संविधान वादा है, तो आयोग उसके रखवालों में से एक', NHRC के 33वें स्थापना दिवस पर बोले CJI सूर्यकांत
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने NHRC के 33वें स्थापना दिवस पर कहा कि आयोग पीड़ितों के लिए एक भरोसेमंद ठिकाना और ...और पढ़ें

अगर संविधान वादा है, तो आयोग उसके रखवालों में से एक। (एएनआई)
HighLights
NHRC पीड़ितों का भरोसेमंद ठिकाना, संविधान का एक रखवाला।
स्वच्छ पानी, पर्यावरण का अधिकार अब मानवाधिकारों में शामिल।
जलवायु परिवर्तन के गंभीर प्रभावों पर CJI ने जताई चिंता।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने सोमवार को कहा कि पीड़ितों के लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) एक भरोसेमंद ठिकाना बन गया है। उन्होंने कहा कि मानवाधिकार आयोग की असली कसौटी सिर्फ यह नहीं है कि वह कितने मामलों का निपटारा करता है, बल्कि यह भी है कि क्या वहां उन लोगों की आवाज सुनी जा सकती है, जो अपनी बात कहने में सबसे कम सक्षम हैं।
एनएचआरसी के 33वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, 'अगर संविधान एक वादा है, तो आयोग उसके रखवालों में से एक है। इसकी पहुंच उन जगहों तक है जहां अदालत आसानी से नहीं पहुंच सकती; यह उन लोगों की सुनता है जो आसानी से बोल नहीं सकते और किसी के कहने का इंतजार किए बिना खुद कार्रवाई कर सकता है।'
इस संदर्भ में उन्होंने हिरासत में यातना या मौत, बंधुआ मजदूरी, औद्योगिक क्षेत्रों में सिलिकोसिस के खतरे और हाशिये पर रह रहे समुदायों के अधिकारों की रक्षा से जुड़े मामलों में उसके हस्तक्षेप का जिक्र किया।
सीजेआई ने कहा कि जीवन व व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित किए जाने के विरुद्ध सुरक्षा के रूप में शुरू हुआ यह अधिकार, गरिमा से जीवन जीने की गारंटी बन गया है। स्वास्थ्य, भोजन, आश्रय, आजीविका और स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार अब उस मानवीय गरिमा के लिए आवश्यक माना जाता है। जीवन के अधिकार में प्रदूषण-मुक्त पानी और हवा का अधिकार भी शामिल है।
उन्होंने ‘जल- जीवन का अमृत : पानी के अधिकार के जरिये मानवीय गरिमा को आगे बढ़ाना’ विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन के साथ इस आयोजन के लिए एनएचआरसी की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत ने पेयजल तक पहुंच बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर प्रयास किए हैं, लेकिन अब अगला सवाल और भी अहम होना चाहिए। क्या पानी सुरक्षित और भरोसेमंद है और जरूरत पड़ने पर उपलब्ध है?
आर्सेनिक, फ्लोराइड या अन्य हानिकारक पदार्थों से दूषित पानी सेवा नहीं, बल्कि जीवन व स्वास्थ्य के लिए खतरा है। उन्होंने कहा कि घटता भूजल, हर प्रदूषित नदी और पेयजल का हर प्रभावित स्रोत उस पीढ़ी पर बोझ डालता है, जिसकी उसमें कोई भूमिका नहीं थी।
हर मिनट अग्निपरीक्षा से गुजरता है सीजेआई का कार्यालय : एनएचआरसी प्रमुख
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के अध्यक्ष जस्टिस (सेवानिवृत्त) वी. रामासुब्रमण्यम ने कार्यक्रम में कहा कि प्रधान न्यायाधीश का कार्यालय हर दिन-हर मिनट अग्निपरीक्षा से गुजरता है और यह परीक्षा लेने वाली हमेशा पवित्र आत्माएं नहीं होतीं।
प्रधान न्यायाधीश की मौजूदगी में उन्होंने कहा कि सीजेआई का कार्यालय देश का सबसे महत्वपूर्ण, सबसे शक्तिशाली, सबसे सक्रिय और सबसे जोखिम वाला कार्यालय बन गया है।
उन्होंने सम्मेलन के विषय पर बोलते हुए कहा कि 1750 में औद्योगिक क्रांति की शुरुआत के बाद से हम वायुमंडल में दो लाख करोड़ टन से अधिक कार्बन डाइआक्साइड छोड़ चुके हैं।
अगर हम मौजूदा रास्ते पर चलते रहे तो अत्यधिक गर्मी के कारण हमारे ग्रह के कुछ हिस्से रहने लायक नहीं रह जाएंगे। जलवायु के कारण पलायन बढ़ेगा। खाद्य व पानी की कमी बार-बार होगी। तूफान और बाढ़ से अधिक से अधिक लोग मारे जाएंगे।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
