नई दिल्ली (जेएनएन)। शहर में पानी खत्म होने को लेकर केपटाउन में काउंटडाउन चल रहा है। माना जा रहा है कि अगले कुछ महीनों में दक्षिण अफ्रीका के इस सबसे धनी शहर के नल सूख जाएंगे। दरअसल इस शहर को पानी इंद्रदेव की कृपा से मिलता है। इसके छह जलाशय बारिश के पानी से भरते हैं। लेकिन 2015 के बाद जलवायु परिवर्तन के चलते यहां बारिश बहुत कम होने लगी। लिहाजा ये जलाशय खाली रह गए। पर्यावरण से जुड़ी डाउन टू अर्थ पत्रिका का एक अध्ययन बताता है।

शहरी प्रशासन की लापरवाही से भी जल संरक्षण नहीं किया जा सका। नींद से जागी सरकार ने यहां पानी के बचाव के लिए कई कदम उठा लिए हैं। हालात ऐसे हैं कि सेना जल आपूर्ति योजनाओं की रक्षा में तैनात की गई है। केपटाउन जैसे हालात सिर्फ अफ्रीका नहीं बल्कि दुनिया के किसी भी कोने में खड़े हो सकते हैं। जरूरत है अभी से पानी के संरक्षण के प्रति जागरूक होने की।

ऐसी है केपटाउन में स्थिति
- कई होटल, क्लब आदि में नल हटा दिए हैं। विकल्प के तौर पर सैनेटाइजर के इस्तेमाल की सलाह दी गई है।
- बगीचों में पानी डालने, वाहन साफ करने पर रोक।
- अधिक इस्तेमाल पर जुर्माना
- जितना ज्यादा पानी का उपयोग किया, उतना अधिक भुगतान।
- 50 लीटर पानी प्रति व्यक्ति प्रतिदिन मिल रहा है।

रोजमर्रा की गतिविधियों को देखा जाए तो ऐसे खर्च होगा पानी
नहाने, कपड़े और बर्तन धोने के लिए : 29 लीटर।
वॉशरूम : 8 लीटरघर की सफाई के लिए : 4 लीटर
पानी पीने के लिए : 4 लीटर
हाथ धोने के लिए : 2 लीटर
कुकिंग के लिए : 2 लीटर
पालतू जानवरों के लिए : 1 लीटर।

ये उपाय कर रहे लोग
- महिलाएं ब्रेड (चोटी) बनवा रही हैं ताकि बाल गंदे न हो और उन्हें बार-बार धोना न पड़े। बाल धोने के लिए ड्राई शैंपू के इस्तेमाल की सलाह दी गई है।
- एक ही पानी का बार-बार इस्तेमाल। बर्तन धोने के लिए "विशेष प्रोबायोटिक साबुन" का उपयोग। उस पानी का घर साफ करने में उपयोग किया जाता है।
- दो मिनट के गाने बनाए : दक्षिण अफ्रीकी पॉप गायकों ने दो मिनट में नहाने के लिए कई गाने बनाए हैं। गौरतलब है कि शॉवर से नहाने में प्रति मिनट 10 लीटर तक पानी खर्च होता है। ऐसे में दक्षिण अफ्रीकी लोगों के लिए पानी की प्रतिदिन निर्धारित मात्रा पांच मिनट में खत्म हो सकती है।

वैश्विक स्तर पर ऐसी है स्थिति

- 3.6 अरब लोग यानी दुनिया की आधी आबादी हर साल एक महीने जलसंकट का सामना करती है।
- 2050 तक पानी की कमी का सामना कर रहे लोगों की संख्या 5.7 अरब पहुंच जाएगी।
- एक सदी में पानी की खपत छह गुना बढ़ी।

इन देशों में भी केपटाउन जैसा खतरा -

बेंगलुरु, भारत

गैरनियोजित शहरीकरण और अतिक्रमण से यहां के जल निकायों में 79 फीसद कमी आ गई है। जबकि शहर का आकार 1973 से अब तक 77 फीसद बढ़ गया है। दो दशक में जलस्तर 76-91 मीटर नीचे चला गया।

जल जागरण: आप कितने पानी में हैं?

बीजिंग, चीन

200 नदियां मैप में है लेकिन सब सूख चुकी हैं। तीन दशक से लोग भूजल के भरोसे जी रहे हैं। भूजल एक मी प्रति साल की दर से गिर और प्रदूषित हो रहा है।

मेक्सिको सिटी, मेक्सिको

700 साल पह इस शहर को ‘वेनिस ऑफ द न्यू वल्र्ड’ कहा जाता था। तैरते हुए बगीचे यहां की शान हुआ करते थे। अब न ये झील हैं और न पानी। भूजल पर अत्यधिक दबाव से 40 सेमी प्रति साल स्तर गिर रहा है।

साना, यमन

भूजल की आखिरी बूंद चूस लेने के बाद शहर दूसरे विकल्पों की ओर देख रहा है। पिछली सदी के आखिरी दिनों में जल स्तर 150 मीटर नीचे पहुंच गया। अनुमान लगाया जा रहा है कि 2019 में शहर बेपानी हो जाएगा।

नैरोबी, केन्या

पानी के लिए शहर भूजल पर आश्रित। 75 फीसद आबादी तीन गुना अधिक कीमत में खरीदकर पीती है पानी।

इस्तांबुल, तुर्की

2020 तक मांग और आपूर्ति के बीच 60.7 करोड़ घनमीटर पानी का अंतर हो सकता है।

कराची, पाकिस्तान

शहर की जरूरत का 50 फीसद ही आपूर्ति हो पाती है। पांच फीसद की दर से आबादी बढ़ रही है। प्रदूषित पानी से जलजनित बीमारियां बढ़ी हैं। 

By Sanjay Pokhriyal