जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के आसमान पर धूल और धुएं का धुंध बनने से पहले औद्योगिक संगठन CII सरकार के साथ कमर कर मैदान में उतर गया है। खेतों में पराली जलाने से रोकने के मद्देनजर एक सौ गांवो को गोद लिया है। पंजाब और हरियाणा के इन गांवों के एक लाख एकड़ खेतों में पराली जलाने से रोकने में मदद करेगा। इन गांवों को पराली जलाने से मुक्त करने का अभियान चलाएगा। इसमें स्थानीय किसान, छात्र, बुद्धिजीवियों और विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा।

CII ने सहयोग के लिए बढ़ाया हाथ

मौसम में नमी के बढ़ने और तापमान घटने के साथ ही राष्ट्रीय राजधानी प्रक्षेत्र (NCR) में धूल और धुएं से दमघोंटू माहौल की आशंका बढ़ जाती है। पंजाब और हरियाणा में धान के खेतों में पराली जलाने को रोकने के लिए सरकार जहां पिछले कई सालों से प्रयास कर रही है, वहीं इस बार प्रमुख औद्योगिक संगठन CII ने भी सहयोग के लिए हाथ बढ़ाया है। धान की कटाई के बाद खेतों में पराली के बचे हिस्से को जलाना किसानों के पास आसान विकल्प होता है। इस पर काबू पाने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है।

खतरनाक स्तर को छूता है प्रदूषण

चालू सर्दी के मौसम में समूचे उत्तरी क्षेत्र में प्रदूषण खतरनाक स्तर को छूने लगता है। कन्फेडरेशन आफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) ने पड़ोसी राज्य पंजाब और हरियाणा के के एक सौ गांवों और वहां की एक लाख एकड़ खेती वाली जमीन को पराली जलाने से मुक्त करने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए दोनों राज्यों में संगठन ने पराली जलाने पर रोक लगाने की गतिविधियां शुरु कर दी है। सीआईआई ने पंजाब के लुधियाना, बरनाला और पटियाला और हरियाणा के रोहतक, सिरसा और फतेहाबाद के गांवों को अपनाया है।

किसानों को बांटी गई मशीनें

सीआईआई ने कुल 15 हजार से अधिक किसानों को पराली प्रबंधन के लिए मशीनें दी है। किसानों को मामूली शुल्क पर कृषि से जुड़ी मशीनरी मुहैया कराई जा रही है। इसके अलावा अपनाये गये गांवों में तकनीकी और बड़ा जागरुकता अभियान शुरु किया है। औद्योगिक संगठन सीआईआई ने गांव के स्तर पर प्रदूषण के स्तर को मापने के लिए निगरानी यंत्र लगाया गया है, ताकि पराली न जाने के प्रभावों का आंकलन किया जा सके। संगठन के मुताबिक पंजाब के तीन हजार से अधिक स्कूली छात्र पराली जलाने से रोकने वाले अभियान का हिस्सा बन गये हैं।

वैकल्पिक टेक्नोलॉजी को किसानों ने अपनाया

पंजाब के 19 गांवों में सीआईआई ने पिछले साल 16 हजार एकड़ जमीन में प्रायोगिक परियोजना शुरु की थी। इसमें कुल तीन हजार किसानों ने हिस्सा लिया था, जिसका नतीजा बहुत उत्साहजनक रहा। संगठन ने परियोजना की सफलता के बारे में बताया कि वर्ष 2017 के मुकाबले 2018 में 80 फीसद किसानों ने पराली नहीं जलायी। वैकल्पिक टेक्नोलॉजी को किसानों ने आगे बढ़कर अपनाया है। चुनिंदा गांवों के 25 हजार टन से अधिक पराली को मिट्टी में मिलाकर सड़ा दिया गया जो प्रदूषण के लिए खतरा बनती।

सीआईआई के महासचिव चंद्रजीत बनर्जी ने इस बारे में कहा कि इस पहल से वायु प्रदूषण को रोकने में मदद मिली है। पिछले साल के 19 गांवों की संख्या को बढ़ाकर अब एक सौ गांव कर दिया गया है। पराली प्रबंधन की दिशा में उनका संगठन पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी, हरियाणा एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी हिसार, पंजाब पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, कृषि विभाग और जिला स्तर पर स्थापित कृषि विज्ञान केंद्रों की भूमिका अहम है।

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Posted By: Dhyanendra Singh

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