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FCRA विधेयक पर जेपीसी के सामने चर्च प्रतिनिधियों ने रखी आपत्ति, सरकार ने आरोपों को नकारा

Published: Mon, 12 Oct 2026 11:24 PM (IST)

विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के समक्ष चर्च और चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रतिनिधियों ने विचार रखे।

FCRA विधेयक संबंधी जेपीसी के समक्ष चर्च प्रतिनिधियों ने रखे विचार।

FCRA विधेयक संबंधी जेपीसी के समक्ष चर्च प्रतिनिधियों ने रखे विचार।

HighLights

  1. चर्च प्रतिनिधियों ने FCRA विधेयक के कुछ प्रावधानों पर आपत्ति जताई।

  2. जेपीसी ने सभी पक्षों के सुझावों को ध्यान से सुनने का आश्वासन दिया।

  3. सरकार ने आरोपों को खारिज करते हुए विधेयक को धर्म-निरपेक्ष बताया।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। विदेशी चंदे से जुड़े विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के समक्ष सोमवार को चर्च के प्रतिनिधियों और चार्टर्ड अकाउंटेंट के प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखे।

सूत्रों ने बताया कि कुछ ईसाई प्रतिनिधियों ने विधेयक के प्रावधानों पर कड़ी आपत्ति जताई और उन्हें हटाने की मांग की। हालांकि किन प्रविधानों पर आपत्ति जताई गई है, यह जानकारी नहीं मिल सकी है।

बैठक के बाद समिति के अध्यक्ष और भाजपा सांसद संजय जायसवाल ने पत्रकारों से कहा, हमने सभी की बातें ध्यान से सुनीं। जब समिति की बैठक होगी, तो हम सबके सुझाव शामिल करेंगे और उन पर चर्चा करेंगे।

समिति के सामने विचार रखने वालों में इंस्टीट्यूट आफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया, कैथोलिक बिशप्स कान्फ्रेंस आफ इंडिया (सीबीसीआइ), आल इंडिया क्रिश्चियन काउंसिल और सेंटर फार एडवांसमेंट आफ फिलैंथ्रापी के प्रतिनिधि शामिल थे। यह विधेयक 25 मार्च 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था। विपक्षी दलों की लगातार मांग के बाद 12 अगस्त को इसे संसद की संयुक्त समिति के पास भेज दिया गया।

विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि इस विधेयक के कुछ प्रविधान अल्पसंख्यकों के खिलाफ हैं। इससे ईसाई गैर-सरकारी संगठनों तथा अल्पसंख्यकों द्वारा संचालित सामाजिक कल्याण और शैक्षणिक संस्थानों को विदेश से मिलने वाली वैध आर्थिक मदद में परेशानी आ सकती है।

सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है। सरकार का कहना है कि यह कानून किसी खास धर्म को निशाना बनाने के लिए नहीं, बल्कि विदेश से मिलने वाले धन को नियंत्रित करने और उसके सही इस्तेमाल को सुनिश्चित करने के लिए लाया जा रहा है।

विधेयक में विदेशी फंडिंग पर सरकार की निगरानी सख्त करने का प्रस्ताव है। इसमें एक प्राधिकरण बनाने का प्रविधान है, जो किसी संगठन का एफसीआरए लाइसेंस रद होने पर उसकी संपत्तियों का प्रबंधन और निपटारा करेगा।

(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)