नई दिल्‍ली (जेएनएन)। गलवन वैली में मई से शुरू हुआ तनाव चीन की सेना के एलएसी से पीछे चले जाने के बाद थमता दिखाई दे रहा है। यहां पर भारत की रणनीति फिर कारगर साबित हुई है और लद्दाख में चीन को मुंह की खानी पड़ी है। ये सब कुछ 30 जून को दोनों देशों की सेना के कमांडर स्तर की तीसरे दौर की बातचीत के बाद हुआ है। इसकी पुष्टि खुद चीन की ही तरफ से की गई है। एएनआई के मुताबिक चीन के मुखपत्र ग्‍लोबल टाइम्‍स ने चीन के विदेश मंत्री के हवाले से लिखा है कि दोनों देशों के बीच हुई दो दौर की वार्ता में बनी सहमित पर दोनों पक्ष अमल कर रहे हैं। आपको बता दें कि भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने इस मुद्दे पर चीन के विदेश मंत्री वांग यी से बातचीत की थी जिसके बाद चीन की सेना पीछे हटी है। चीन से सीमा पर उपजे तनाव के बीच रिटायर्ड मेजर जनरल पीके सहगल ने कहा कि ड्रेगन ने जिस मकसद से गलवन का विवाद खड़ा किया है उसमें वो सफल होने वाला नहीं है। 

आपको बता दें मई 15-16 की रात को गश्‍त के दौरान जब भारतीय जवानों ने चीन के सैनिकों को भारतीय सीमा से पीछे हटने को कहा था तब उन्‍होंने भारतीय सैनिकों पर लोहे की कटीली तार से उनके ऊपर हमला कर दिया था जिसमें 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे। इसके बाद से ही सीमा पर जबरदस्‍त तनाव है। भारत सीमा पर जवानों की चौकसी बढ़ाने के साथ-साथ एहतियात के तौर पर दूसरे उपाय भी कर रहा है, जिससे चीन के किसी भी दुस्‍साहस का कड़ाई से जवाब दिया जा सके।

चीन को भारत की ताकत है अहसास

आपको ये भी बता दें कि पिछले दिनों पीएम नरेंद्र मोदी ने लद्दाख स्थित सेना के डिविजनल हैडक्‍वार्टर का भी दौरा किया था। उन्‍होंने यहां पर जवानों की बहादुरी की सराहना की थी और उन्‍हें विश्‍वास दिलाया था कि पूरा देश उनके साथ खड़ा है। भारत सरकार ने सीमा पर चीन से निपटने के लिए जवानों को खुली छूट भी दी है, जिससे चीन को उसीसमय सबक सिखाया जा सके। इस पूरे मुद्दे पर सहगल ने दैनिक जागरण से हुई बातचीत के दौरान बताया कि अब 1965 का दौर नहीं है। भारतीय फौज किसी भी स्थिति में दुश्‍मन को करारा जवाब देने में सक्षम है। उनके मुताबिक चीन इस बात को बखूबी जानता है कि युद्ध कोई विकल्‍प नहीं है। उसे भारत की ताकत का पूरा अहसास है। वे मानते हैं कि चीन चाहता है कि भारत जो विश्‍व की उभरती हुई ताकत बन रहा है वो अपने आपको सीमित कर ले। इसके पीछे उसका मकसद इस पूरे क्षेत्र में अपने कम महत्‍व को बचाना है।

भारत से ये चाहता है चीन

मेजर जनरल सहगल का ये भी कहना है कि चीन चाहता है कि भारत अमेरिका के साथ खुद को रणनीतिक साझेदारी से दूर कर ले। वे ये भी मानते हैं कि चीन जानता है कि एलएसी में बदलाव से उसको कुछ हासिल होने वाला नहीं है। चीन ये भी चाहता है कि भारत हांगकांग और ताइवान के मुद्दे पर उसके खिलाफ कोई बयानबाजी न करे। ऐसे में चीन केवल अपने फायदे के लिए भारत से एक पॉलिटिकल कंसेशन चाहता है जो भारत उसको किसी भी सूरत से नहीं दे सकता है। भारत की तरफ से ये भी साफ कर दिया गया है कि वो लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक चीन को एक इंच जमीन पर कब्‍जा नहीं करने देगा। इस पर चीन शांति के साथ रजामंद हो जाता है तो ठीक नहीं तो इसके गंभीर परिणाम उसको भुगतने होंगे। उनके मुताबिक भारत की तरफ से कोई कंसेशन न मिलने पर चीन खुद को पीछे नहीं हटाएगा।

चौतरफा घिर चुका है चीन  

उन्‍होंने दैनिक जागरण को बताया कि चीन ने इतना बड़ा विवाद पैदा किया है, इसलिए वो आसानी से पीछे नहीं हटने वाला है। चीन का मुखपत्र ग्‍लोबल टाइम्‍स लगातार भारत को धमका रहा है। उनके मुताबिक वर्तमान में चीन बुरी तरह से घिर चुका है, लिहाजा उसको अपनी सेना को पीछे हटाना ही होगा। लेकिन इसमें लंबा वक्‍त लगेगा। मौजूदा समय में चीन पूरी तरह से अलग-थलग है जबकि भारत का साथ पूरी दुनिया दे रही है। सीमा पर भारतीय तैयारियों के मद्देनजर सहगल का कहना है कि भारत इसके प्रति पूरी तरह से सजग है। इजरायल और रूस से भारत ने बम, मिसाइलों के सौदे को अंतिम रूप दिया है। सरकार सेना के लिए मिसाइल (स्‍पाइक मिसाइल, स्‍पाइस 2000 बम, बराक 8 मिसाइल अस्‍त्र, मिटियोर मिसाइल) समेत दूसरी चीजें खरीद रही है। कुछ समय बाद हमें और राफेल विमान मिल जाएंगे। इसके अलावा सरकार हर वो चीज करने को तैयार है जिससे सीमा की सुरक्षा को अभेद्य बनाई जा सके। वर्तमान में भारतीय सेना हर तरह से तैयार है।

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Posted By: Kamal Verma

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