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CPEC को बड़ा झटका, आर्थिक तंगी और आतंकी हमलों के डर से ग्वादर पोर्ट छोड़ सकता है चीन; रिपोर्ट में दावा

Published: Sat, 26 Sep 2026 09:54 PM (IST)

ऑस्ट्रेलियाई थिंक टैंक की रिपोर्ट के अनुसार, चीन ग्वादर पोर्ट से पीछे हट सकता है क्योंकि उसे आर्थिक और सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

ग्वादर पोर्ट से पीछे हट सकता है चीन

ग्वादर पोर्ट से पीछे हट सकता है चीन

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया के एक पालिसी थिंक टैंक ने दावा किया है कि चीन आने वाले समय में पाकिस्तान स्थित ग्वादर पोर्ट से पीछे हट सकता है। पोर्ट पर चीन को कई तरह की आर्थिक और सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। यह चीन-पाकिस्तान इकोनामिक कारिडोर का मुख्य हिस्सा और बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का अहम प्रोजेक्ट है।

ऑस्ट्रेलिया के पालिसी थिंक टैंक लोवी इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि इसे चलाने में आने वाले भारी खर्च की वजह से चीन आखिरकार इस बंदरगाह को छोड़ सकता है।

शिनजियांग से ग्वादर तक जाने वाले सामान को गिलगित-बाल्टिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान से होकर गुजरना होता है।

ये इलाके सांप्रदायिक हिंसा, तालिबान की गतिविधियों और गहरे स्तर पर फैले स्थानीय विद्रोह से प्रभावित हैं। इसके अलावा, सामान को काराकोरम हाईवे से होकर ले जाना पड़ता है। यह इलाका भूस्खलन, बर्फीले तूफान और खराब मौसम की चपेट में रहता है।

ग्वादर अक्सर बलूच लिबरेशन आर्मी जैसे समूहों का निशाना बनता रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसी वजह से चीनी इंजीनियरिंग यूनिट, उनके काफिले और इंफ्रास्ट्रक्चर, खतरनाक आत्मघाती हमलों और गुरिल्ला हमलों के मुख्य निशाने बन गए हैं।

हमलों से बचाने के लिए पाकिस्तान ने स्पेशल सिक्योरिटी डिवीजन बनाया, लेकिन यह चीनी इंफ्रास्ट्रक्चर और लोगों की सुरक्षा में नाकाम रहा है। चीन भी एक ऐसे कमर्शियल रूप से असफल प्रोजेक्ट की रक्षा के लिए पूंजी और नागरिकों की जान गंवाने से अब ऊबने लगा है।

रिपोर्ट में दावा है कि चीन कामकाज का दायरा कम करके धीरे-धीरे बंदरगाह से पीछे हट जाएगा, जिससे ग्वादर मेगा-पोर्ट की जगह नेवल री-फ्यूलिंग स्टेशन में बदल जाएगा। चीन आगे चलकर लीज की शर्तों में पूरी तरह बदलाव भी कर सकता है।

(न्यूज एजेंसी आईएएनएस के इनपुट के साथ)