नई दिल्ली, [जागरण स्पेशल]। तकनीक के मामले में सिलिकॉन वैली को टक्कर देने की ख्वाहिश रखने वाले चीन को कोरोना वायरस से जूझना पड़ रहा है। पिछले कुछ दशकों में तकनीक को लेकर चीन ने काफी काम किया है। उसके विकास में यह दिखता भी है। कोरोना से मुकाबले के लिए चीन ने ड्रोन से लेकर सुपर कंप्यूटर तक सब कुछ झोंक दिया है। बावजूद इसके यह काबू में नहीं आ पा रहा है। यह चीन के तकनीक की भी परीक्षा है।

चीनी तकनीक की गति

चीन में तकनीक को लेकर तेजी 1980 से मानी जाती है। उस वक्त देश के विभिन्न हिस्सों में 'हाइटेक डेवलपमेंट जोन' बनाए गए। मुख्यत: इनमें उपभोक्ताओं के लिए अन्य तकनीकों के साथ ही इलेक्ट्रॉनिक और जैव प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्र भी शामिल थे। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 168 जोनों के द्वारा 33 ट्रिलियन युआन (करीब 4.7 ट्रिलियन डॉलर) का राजस्व एकत्रित किया।

विनिर्माण से उच्च तकनीक की ओर

'मेड इन चाइना 2025' पहल के तहत चीन की कोशिश अर्थव्यवस्था को विनिर्माण क्षेत्र से उच्च तकनीकी क्षेत्र की ओर ले जाने की योजना है। इसके लिए वायरलेस कम्यूनिकेशन, माइक्रोचिप्स और रोबोटिक्स में अरबों डॉलर का निवेश किया है। चीन ने तकनीक को केंद्र में रखकर काम किया है। वेंचर कैपिटल फर्म क्लेनर पार्किंसन के मुताबिक, 2018 में दुनिया की सबसे मूल्यवान तकनीकी कंपनियों में से नौ चीन की हैं।

कोरोना से मुकाबले में तकनीक

कोरोना से मुकाबले के लिए चीन की दिग्गज तकनीकी कंपनियों ने मदद का हाथ बढ़ाया है। फिर चाहे बात इलाज ढूंढने के लिए तेजी से गणना के लिए सुपरकंप्यूटर हो या फिर मानव से मानव के मध्य संपर्क को खत्म करने के लिए रोबोट का इस्तेमाल हो।

सुपर कंप्यूटर

कोरोना से मुकाबले के लिए चीन इस महीने टेनसेंट ने अपनी सुपर-कंप्यूटर की सुविधाओं को उपलब्ध कराया है। यह साधारण कंप्यूटर की तुलना में बहुत तेजी से गणना कर सकते हैं। शोधकर्ताओं को कोरोना का इलाज तलाशने में इससे मदद मिल सकती है। इसका लाभ उठाने वालों में बीजिंग लाइफ साइंसेज इंस्टीट्यूट और सिंहुआ विश्वविद्यालय भी शामिल हैं।

सड़क पर दौड़ने वाले रोबोट

चीन की सबसे बड़ी ऑनलाइन टैक्सी कंपनी दीदी चिकित्सा और सहायता संगठनों के साथ मिलकर काम कर रही है। कंपनी ने अपने सर्वर का उपयोग आंकड़ों का विश्लेषण, ऑनलाइन तंत्र विकसित करने और रसद पहुंचाने के लिए मुफ्त दे रही है। ई-कॉमर्स दिग्गज जेडी डॉट कॉम ने वुहान में चिकित्सा कर्मचारियों के सामान लाने के लिए स्व-ड्राइविंग रोबोट को उपलब्ध कराया है। इन्हें बॉट नाम दिया गया है। यह वाहनों की तरह दिखते और चलते हैं। उन अस्पताल में सामान पहुंचाते हैं, जो मुख्य रूप से कोरोना वायरस के रोगियों का इलाज करते हैं। यह दूरी करीब 600 मीटर है, लेकिन मनुष्यों के एक दूसरे के संपर्क में आने से बचाने से मदद मिली है।

दवा छिड़कने वाले रोबोट

इसके साथ ही स्टार्टअप शंघाई टेमेरॉब ने वुहान में दर्जनों रोबोट उपलब्ध कराए हैं। चीनी मीडिया के अनुसार यह रोबोट रोगियों के वार्ड में संक्रमण रोकने के लिए दवाओं के छिड़काव के साथ ही आइसीयू और अन्य स्थानों पर भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

ड्रोन से निगरानी

कोरोना के प्रकोप को रोकने के लिए ड्रोन की भी सहायता ली जा रही है। किसी को चिकित्सा की आवश्यकता होने पर यह तकनीक अधिकारियों को बड़ी भीड़ और स्थल के माध्यम से स्कैन करने की अनुमति देती है।

शेंजेन स्थित एक ड्रोन स्टार्टअप ने देश भर में करीब 100 ड्रोन भेजे हैं। साथ ही कमांड सेंटरों पर करीब 200 कर्मचारी को निगरानी के लिए भेजा गया है। जहां पर वे पता लगा सकते हैं कि ड्रोन क्या देख रहे हैं?

.. और आलोचनाएं भी

तकनीक के जरिए विशाल भू-भाग पर नजर रखी जा रही है। इसे लेकर मानवाधिकार संगठनों ने स्वतंत्रता के उल्लंघन का आरोप लगाया है। चीन ने चेहरे की पहचान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अन्य तकनीकों का इस्तेमाल अपराध पर नकेल कसने और अपने नागरिकों की निगरानी के लिए किया है। ऐसे में कोरोना के प्रकोप के समय ऐसे आरोप फिर से उठ खड़े हुए हैं।

जीतेगा भारत हारेगा कोरोन

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस