अरुणाचल प्रदेश से लगी LAC के करीब तिब्बतियों को बसा रहा चीन, नागरिक बस्तियों की आड़ में बना रहा सैन्य अड्डे
चीन अरुणाचल प्रदेश से लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के करीब तिब्बतियों को बड़े पैमाने पर बसा रहा है।

अरुणाचल प्रदेश से लगी LAC के करीब तिब्बतियों को बसा रहा चीन। (प्रतीकात्मक तस्वीर)
HighLights
नागरिक बस्तियों की आड़ में चीन के सामरिक एवं सैन्य अड्डे
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय सीमा के ठीक पार चीन की चालाकियां अब एक अदृश्य लेकिन अत्यंत गंभीर खतरे के रूप में सामने आ रही हैं। एक हालिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि चीन अरुणाचल प्रदेश से लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के करीब तिब्बतियों को बड़े पैमाने पर बसा रहा है।
इसका दीर्घकालिक और खतरनाक उद्देश्य इस विवादित सीमा को एक साधारण चीनी प्रांतीय सीमा जैसा दिखाना है, ताकि आने वाले दशकों में अरुणाचल प्रदेश में एक सुनियोजित 'जनसांख्यिकीय घुसपैठ' को बढ़ावा दिया जा सके।
रिपोर्ट के अनुसार, बीजिंग अपनी गरीबी-उन्मूलन और सीमावर्ती गांव योजनाओं के तहत तिब्बतियों को इन क्षेत्रों में तेजी से स्थानांतरित कर रहा है, जिससे भारत की रणनीतिक गहराई पर संकट मंडरा रहा है।
नागरिक बस्तियों की आड़ में चीन के सामरिक एवं सैन्य अड्डे
यह खतरा किसी अचानक होने वाले सैन्य हमले का नहीं, बल्कि राष्ट्र द्वारा प्रायोजित उस जनसांख्यिकीय ढांचे का है जो सीमा पर चीन की पकड़ को मजबूत कर रहा है। चीन के लगभग 72 प्रतिशत सीमावर्ती गांव भारत के उत्तर-पूर्वी सेक्टर में एलएसी के करीब स्थित हैं, जिनमें से 90 प्रतिशत अकेले अरुणाचल प्रदेश के सामने हैं।
ये बस्तियां केवल नागरिक आबादी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनकी आड़ में खुफिया निगरानी, उन्नत संचार और सैन्य रसद (लॉजिस्टिक्स) के केंद्र तैयार किए जा रहे हैं, जिन्हें सड़क और बुनियादी ढांचे के विकास के नाम पर छिपाया जा रहा है।
भारत को अपनी सीमा नीति में त्वरित कदम उठाने की जरूरत
लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) अभय कृष्णा द्वारा दी गई इस चेतावनी के मुताबिक, चीन की इस चाल का मकसद आने वाली पीढ़ी के दिलों-दिमाग पर प्रभाव डालना है ताकि वे खुद को भारतीय की बजाय तिब्बती जैसा महसूस करने लगें।
हालांकि भारत ने 2014 के बाद से अपनी उत्तरी सीमा पर सड़कों, सुरंगों और पुलों का जाल बिछाकर ऐतिहासिक प्रगति की है, लेकिन अब समय आ गया है कि अरुणाचल, सिक्किम, उत्तराखंड, हिमाचल और लद्दाख जैसे सीमावर्ती राज्यों के साथ मिलकर भारतीय बस्तियों को भी एलएसी के और करीब बसाया जाए। समय रहते एक ठोस कार्ययोजना और वित्तीय प्रविधानों के साथ कड़े कदम उठाना ही इस रणनीतिक चुनौती का एकमात्र प्रभावी जवाब है।
(समाचार एजेंसी आईएएनएस के इनपुट के साथ)
