नई दिल्ली, जयप्रकाश रंजन। चीन के बढ़ते दबदबे पर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में कूटनीति का नया हलचल शुरू हो गया है। नई दिल्ली से एक बड़ा संकेत दिया गया। एक तरफ भारत ने पांच हजार किलोमीटर की मारक क्षमता की अग्नि-पांच मिसाइल का सफल परीक्षण किया, इससे भारत के पास चीन के दूसरे छोर तक मार करने की क्षमता हो गई है। वहीं इस परीक्षण के कुछ ही घंटे बाद भारत, अमेरिका, जापान और आस्ट्रेलिया के नौ सेना प्रमुख एक ही मंच पर एकत्रित हुए।

यह मंच रायसीना डायलॉग का था, जिसमें इंडो-पैसिफिक से जुड़े मुद्दों पर चार चर्चाएं हुई। इसमें बांग्लादेश, श्रीलंका, भारत से लेकर सिंगापुर, इंडोनेशिया, ईरान, अफगानिस्तान, रूस तक के दिग्गज अधिकारियों ने हिस्सा लिया। पूरा लब्बो-लुआब यह था कि आने वाले दिनों में इस क्षेत्र में चीन के बढ़ते दबदबे को लेकर भारत को अपनी कमर कसनी होगी।

भारत के नौ सेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा, अमेरिका के पैसिफिक कमांड के कमांडर एडमिरल हैरी हैरिस जूनियर, जापान के चीफ ऑफ स्टाफ (ज्वाइंट स्टाफ) एडमिरल कात्सुतोषी कवानो, आस्ट्रेलिया के चीफ ऑफ नेवी वाइस एडमिरल टिम बैरेट का एक मंच पर जुटना ही बेहद महत्वपूर्ण है। नवंबर, 2017 में मनीला (फिलीपींस) में इन चार देशों के बीच संयुक्त गठबंधन बनाने को लेकर हुई पहली चर्चा के बाद यह पहला मौका था जब इन देशों के नौ सेना प्रमुख एक साथ हुए थे। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के सामने उक्त चारों देशों का गठबंधन अब पक्का स्वरूप लेने लगा है।

यही नहीं इसी मंच पर इंडोनेशिया के विदेश नीति तय करने के विभाग के फाउंडर डिनो पटी जलाल भी थे। इनका एक साथ एक मंच पर होना ही काफी था, लेकिन बातें यहीं नहीं रुकी। सभी ने जो बातें कहीं वे भी सीधे तौर पर चीन की तरफ इशारा था। मसलन, एडमिरल हैरिस ने कहा कि, 'इंडो-पैसिफिक में ऐसे देश व संस्थाएं हैं जो यहां शांति व समृद्धि को प्रभावित कर सकते हैं। इस क्षेत्र में सभी मुक्त आवागमन करें, इसके लिए साहस दिखाना होगा। भारत को चीन की बढ़ते वर्चस्व को स्वीकार करने की चुनौती को आगे चल कर स्वीकार करना होगा।' चार देशों के गठबंधन को उन्होंने आज की वास्तविकता बताते हुए कहा कि अगर आपके पास ताकत नहीं है तो दूसरे पक्ष से सौदा करने की क्षमता भी आपके पास नहीं होती।

भारत के नौ सेना प्रमुख भी खुल कर बोले। उन्होंने की चीन की नौ सेना पर भारत को घेरने का परोक्ष आरोप लगाते हुए कहा कि चीनी नौ सेना ने हाल के दिनों में अपनी रणनीति बदली है, चीन ऐसे बंदरगाह विकसित करने लगा है जिसका कोई मतलब नहीं है। जबकि जापान के एडमिरल कवानो ने बगैर लाग लपेट के इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ते तनाव के लिए चीन को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि चीन अंतरराष्ट्रीय कानूनों को तोड़ रहा है। ऐसे में भारत, अमेरिका, जापान व आस्ट्रेलिया को एक साथ आना होगा।

सनद रहे कि पिछले वर्ष ही भारत और अमेरिका के बीच होने वाले नौ सेना अभ्यास में जापान भी शामिल हुआ है और अब उम्मीद है कि आस्ट्रेलिया भी हिस्सा लेगा। इंडोनेशिया ने संकेत दिया कि वह भी इन चार देशों के गठबंधन में आगे चल कर शामिल हो सकता है। इसके लिए उसने इस गठबंधन को और व्यापक बनाने की वकालत की, जिसका समर्थन भारत ने भी किया।

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Posted By: Tilak Raj