नई दिल्ली, एजेंसियां। कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर पहले से ही सवालों के घेरे में चल रहे चीन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। अब जर्मनी की समाचार पत्रिका 'डेर स्पीगल' ने दावा किया है कि चीन ने कोरोना फैलने को लेकर वैश्विक चेतावनी जारी करने में देरी करने का आग्रह विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) से किया था। पत्रिका के अनुसार, इसके लिए चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने खुद डब्ल्यूएचओ प्रमुख टेड्रोस एडहैनम को फोन किया था। इसमें उनसे आग्रह किया था कि वे चेतावनी जारी करने में देरी करें। पत्रिका ने जर्मनी की फेडरल इंटेलिजेंस सर्विस से मिली जानकारी के आधार पर यह दावा किया है।

पत्रिका के मुताबिक, जानलेवा वायरस फैलने के दौरान जनवरी में यह फोन करके चीन के राष्ट्रपति ने टेड्रोस से उपरोक्त आग्रह किया था। हालांकि डब्ल्यूएचओ ने इस मीडिया रिपोर्ट का खंडन किया है। संगठन ने एक के बाद एक ट्वीट करके कहा कि शी चिनफिंग और टेड्रोस के बीच कभी कोई बातचीत नहीं हुई। इस तरह की गलत रिपोर्टो से कोविड-19 महामारी से लड़ने के डब्ल्यूएचओ और विश्व के प्रयासों को आघात पहुंचता है। इससे पहले अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने भी विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन पर गंभीर आरोप लगाए थे। हालांकि तब भी डब्ल्यूएचओ ने उन आरोपों को खारिज कर दिया था। 

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा कि चीन ने 20 जनवरी को कोरोना वायरस के आदमी से आदमी के संक्रमण की जानकारी दी थी। डब्ल्यूएचओ ने 22 जनवरी को कहा कि आंकड़ों से पता चलता है कि वुहान में आदमी से आदमी को संक्रमण हो रहा है। मार्च महीने में इसने कोरोना वायरस को महामारी घोषित कर दिया। उल्लेखनीय है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी डब्ल्यूएचओ पर कोरोना से संबंधित जानकारी छिपाने का आरोप लगाते रहे हैं। वे इस वैश्विक संगठन को चीनी प्रचार तंत्र का एक हथियार बता चुके हैं। उन्होंने इसे अमेरिका की तरफ से दी जा रही मदद पर भी रोक लगा दी है।

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