डा. मोनिका शर्मा। अमेरिकी साफ्टवेयर सिक्योरिटी कंपनी मैकफी द्वारा वैश्विक स्तर पर पारिवारिक जीवन में स्क्रीन के दखल को लेकर किए गए सर्वे के नतीजे भारतीय बच्चों की सुरक्षा के मोर्च पर चेताने वाले हैं। गौरतलब है कि मैकफी ने अमेरिका, भारत, ब्रिटेन समेत 10 देशों के 15,500 माता-पिता और उनके 12,000 बच्चों पर यह सर्वे किया है। यह आनलाइन दुनिया में बच्चों और बड़ों द्वारा बिताए जा रहे समय और उससे जुड़े खतरों को रेखांकित करता है।

हाल के वर्षों में वर्चुअल दुनिया में भी खुद को सुरक्षित रखना चिंता का विषय बन गया है। कमोबेश हर उम्र के लोगों के लिए ही साइबर संसार में कोई न कोई जोखिम है, पर बच्चों से जुड़े खतरे वाकई चिंतनीय हैं। खतरों की इस सूची में निजी जानकारियां चुराकर अनाधिकृत इस्तेमाल करने, साइबर बुलिंग और अकाउंट हैक कर लेने जैसे खतरे शामिल हैं।

समझना मुश्किल नहीं कि इन सभी बातों से मानसिक प्रताड़ना, डराना-धमकाना, यौन हिंसा, अश्लील चित्र भेजना या मंगवाना और ब्लैकमेल करने जैसे और कई जोखिम जुड़े हैं। सर्वे में सामने आया है कि वैश्विक स्तर पर 17 या 18 साल की उम्र में साइबर बुलिंग की घटनाओं में 18 फीसद बढ़ोतरी हुई है। आनलाइन अकाउंट हैक करने की 16 प्रतिशत और दूसरों की निजी जानकारियों के अनधिकृत इस्तेमाल की घटनाएं 14 फीसद बढ़ गई हैं। साथ ही बच्चों के लिए खतरा इसलिए भी बढ़ गया है कि बच्चों का एक बड़ा वर्ग अभिभावकों से मदद मांगने के बजाय बातों को छिपाने लगा है।

यह सर्वे बताता है कि 59 फीसद बच्चों ने माता-पिता से अपनी आनलाइन गतिविधियों को छिपाया। अमेरिका में साइबर बुलिंग की घटनाएं सबसे ज्यादा होती हैं। वहां 28 फीसद बच्चे वर्चुअल दुनिया में बुलिंग के शिकार हैं। वहीं हमारे यहां 22 प्रतिशत बच्चे साइबर बुलिंग के शिकार हैं। अमेरिका में आनलाइन रहने वाले बच्चों की तादाद भारत से कहीं अधिक है। भारतीय बच्चों का यह आंकड़ा वैश्विक औसत से पांच फीसद ज्यादा है।

कुछ समय पहले चाइल्ड राइट्स एंड यू द्वारा राजधानी दिल्ली में किए गए एक सर्वे में भी सामने आया था कि साइबर बुलिंग का दंश झेलने वाले 50 फीसद बच्चों ने अपने मां-बाप और किसी बड़े को इसके बारे में नहीं बताया। हालांकि, इस शोध में यह भी पता चला कि बच्चों की एक बड़ी आबादी ने आनलाइन सुरक्षा के लिए दूसरे संसाधनों से ज्यादा अपने माता-पिता से ही सहायता लेनी चाही। ऐसे में अब जरूरी हो गया है कि अभिभावक खुद भी वर्चुअल दुनिया की गतिविधियों को लेकर सजग रहें। साथ ही आनलाइन संसार में असीमित समय बिताने के बजाय साइबर सिक्योरिटी से जुड़ी सूचनाओं को स्वयं समझकर बच्चों से भी समय रहते साझा करें।

(लेखिका स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं)

Edited By: Tilakraj