छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: पत्नी का बार-बार आपराधिक मामले चलाना मानसिक क्रूरता, तलाक मंजूर
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पति के खिलाफ दहेज प्रताड़ना और घरेलू हिंसा के मामले दर्ज कराने, आरोपितों के बरी होने ...और पढ़ें

पत्नी का बार-बार आपराधिक मामले चलाना मानसिक क्रूरता, तलाक मंजूर (सांकेतिक तस्वीर)
HighLights
पति व ससुराल वालों पर दहेज प्रताड़ना का लगाया था आरोप, सातों आरोपित बरी
अपील और घरेलू हिंसा की कार्रवाई भी खारिज होने के बाद पत्नी ने दी थी चुनौती
जेएनएन, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पति के खिलाफ दहेज प्रताड़ना और घरेलू हिंसा के मामले दर्ज कराने, आरोपितों के बरी होने के बाद भी उन फैसलों को चुनौती देने और लगातार कानूनी कार्यवाही जारी रखने को मानसिक क्रूरता माना है।
न्यायमूर्ति पार्थ प्रतिम साहू और न्यायमूर्ति सुषमा सावंत की डिवीजन बेंच ने जांजगीर निवासी विशंभर प्रसाद राठौर (29 वर्ष) की याचिका मंजूर करते हुए उनकी पत्नी मनीषा राठौर (30 वर्ष) से विवाह समाप्त करने का आदेश दिया है।
विशंभर और मनीषा का विवाह 2015 में हुआ था। पति ने आरोप लगाया कि शादी के बाद पत्नी कुछ ही दिन ससुराल में रही और विवाद शुरू हो गया। उन्होंने पत्नी पर दुर्व्यवहार और घर में अशांति पैदा करने के आरोप लगाए।
परिवार न्यायालय ने आठ अगस्त 2019 को आरोप साबित न होने के कारण तलाक का आवेदन खारिज कर दिया। पत्नी की शिकायत पर पति और उसके परिवार के छह अन्य सदस्यों के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का मामला चला, जिसमें 14 दिसंबर 2023 को सभी आरोपित बरी हो गए।
पत्नी की अपील भी सात मार्च 2025 को खारिज हो गई। इसके बाद भी कानूनी कार्रवाई जारी रही, तब पति ने हाई कोर्ट में तलाक की याचिका दाखिल की।
कोर्ट ने कहा कि केवल शिकायत दर्ज कराना मानसिक क्रूरता नहीं है। जब शिकायत के बाद मुकदमा चले और पति तथा परिवार के सदस्य बरी हों, फिर भी कानूनी कार्यवाही जारी रहे, तो इसे वैवाहिक संबंधों की पृष्ठभूमि में देखना आवश्यक है।
