पटना। छठ के पावन पर्व पर शाम को अ‌र्घ्य के दौरान पटना के अदालतगंज घाट पर हुई दुर्घटना की राजनीतिक दलों ने सीबीआई जांच कराने की मांग की है। इसके साथ ही सरकार ने गृह सचिव को भी इस हादसे पर कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं। वहीं नीतीश सरकार ने हादसे में मरने वालों के परिजनों को 2 लाख रुपये मुआवजे के तौर पर देने की घोषणा की है।

इस बीच, हादसे को लेकर राजनीति प्रतिक्रियाएं भी आनी शुरू हो गई हैं। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद के अध्यक्ष लालू यादव ने नीतीश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जब उनकी सरकार थी तो ऐसा कुछ नहीं होता था। उन्होंने कहा कि जल्दबाजी में छठ की तैयारियां की गई। इसलिए काफी लापरवाही हुई है। जिसकी वजह से यह हादसा हुआ है। राजद के साथ-साथ लोजपा ने भी इस हादसे के लिए नीतीश सरकार को जिम्मेदार ठहराया है।

गौरतलब है कि रविवार शाम छठ के पहले अ‌र्घ्य के दौरान घाट पर मची भगदड़ में कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई और तीन दर्जन से ज्यादा लोग घायल हो गए। मृतकों में चार महिलाएं और आठ बच्चे शामिल हैं। घटनास्थल पर देर रात तक अफरातफरी की स्थिति रही। पर्व के मौके पर हुए इस हादसे से पटना समेत पूरे सूबे में शोक का माहौल व्याप्त हो गया।

दुर्घटना की खबर सुनते ही डीजीपी अभयानंद अदालतगंज घाट पहुंचे और वहां से पटना मेडिकल कालेज एवं अस्पताल [पीएमसीएच] जाकर अधिकारियों को चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराने का आदेश दिया। घायलों को पीएमसीएच और निजी नर्सिग होम में भर्ती कराया गया है। पीएमसीएच में इलाज की समुचित व्यवस्था नहीं थी। इसे लेकर परिजनों ने हंगामा भी किया। लोग चिकित्सकों को तलाशते रहे। देर रात डाक्टरों के व्यवस्था संभालने की खबर है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार महेंद्रू घाट पर अ‌र्घ्य देने के लिए बनाया गया चचरी का पुल शाम को अत्याधिक भीड़ के कारण टूट गया। घाट पर बने चचरी के दो पुलों में एक के टूटने से सुरक्षा कारणों से पुल के दूसरी ओर मौजूद पुलिस कर्मियों ने अ‌र्घ्य देकर लौटने वालों को रोककर पीपा पुल से जाने की सलाह दी। घाट पर मौजूद सभी लोग पीपा पुल से लौटने के लिए उस ओर बढ़ गए। धीरे-धीरे पीपा पुल पर जाम की स्थिति हो गई।

अदालतघाट से बाहर मुख्य मार्ग को जोड़ने वाली बेहद संकरी गली में तिल रखने की भी जगह नहीं बची। लोग एक दूसरे को धक्का देते आगे बढ़ रहे थे। इसी बीच गली की सजावट में इस्तेमाल बिजली का नंगा तार किसी को छू गया। करंट का असर दूसरे-तीसरे तक पहुंचने लगा। इससे भगदड़ मच गई। इसी बीच बिजली विभाग ने पूरे इलाके की बत्ती काट दी। चारो ओर अंधेरा फैलते ही अफरातफरी मच गई। लोग एक-दूसरे को धक्का देकर किसी तरह जान बचा आगे निकल जाना चाहते थे। धक्का-मुक्की के कारण लोग जहां-तहां गिरने लगे। बेहोश होने लगे और कुछ दबकर मर गए या गंभीर रूप से जख्मी हो गए। मृतकों में अधिकांश बच्चे व महिलाएं हैं।

घटना के बाद चारों ओर चीत्कार सुनाई पड़ने लगी। लापता लोगों की तलाश शुरू की गई। लाशों के ढेर से लोग अपनों को खोज रहे थे। इसी बीच सूचना मिलते ही प्रशासन बचाव कार्य में जुट गया। घायलों को अस्पताल भेजा गया। लोग अपनों की तलाश में पटना मेडिकल कालेज अस्पताल [पीएमसीएच] की ओर दौड़े। कुछ घायलों को परिजनों ने निजी अस्पतालों में दाखिल किया है।

नीतीश ने दुख जताया, पीड़ितों को दो-दो लाख देगी सरकार

बिहार सरकार राजधानी पटना के अदालतगंज घाट पर भगदड़ में मरने वालों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये मुआवजा के तौर पर देगी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने छठ पूजा पर हुई दुर्घटना के तुरंत बाद मुख्यसचिव एके सिन्हा व पुलिस महानिदेशक अभयानंद को घटनास्थल पर जाकर राहत व बचाव कार्य को तेजी से चलाने का निर्देश दिया। घटना पर गहरा शोक जताते हुए नीतीश कुमार ने लोगों से अपील की कि वे शांति व धैर्य बनाए रखें। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को आपदा प्रबंधन विभाग के कोष से पचास-पचास हजार रुपये और मुख्यमंत्री सहायता कोष से डेढ़-डेढ़ लाख रुपये यानी कुल दो-दो लाख रुपये सहायता के रूप में उपलब्ध कराने का आदेश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के गृह सचिव घटना की विस्तृत जांच करेंगे।

पीएमसीएच में देर तक नहीं मिले डाक्टर

पटना [जागरण संवाददाता]। राज्य के सबसे बड़े अस्पताल पीएमसीएच की पोल एक बार फिर खुल गई। मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने का दावा करने वाले इस अस्पताल में सोमवार को अदालतगंज हादसे के शिकार लोगों के पहुंचने पर डाक्टर नहीं मिले। घायलों की चीख-पुकार के बाद इमरजेंसी ड्यूटी में तैनात कुछ जूनियर डाक्टर सक्रिय हुए। लेकिन हादसा मामूली नहीं था। अस्पताल में आने वाले घायलों की संख्या लगातार बढ़ रही थी। इस अस्पताल में अव्यवस्था के आलम का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खुद डीजीपी अभयानंद को डाक्टरों की तलाश में इधर-उधर भागना पड़ रहा था। बहरहाल टीवी पर हादसे का समाचार दिखाये जाने के साथ ही पूरी सरकार सक्रिय हुई और फोन घनघनाने लगे तो अस्पताल में डाक्टरों का आना शुरू हुआ। लेकिन इसके पहले ही कुछ घायलों के परिजन अपने लोगों की जाने बचाने के लिए उन्हें खुद एंबुलेंस में लादकर निजी अस्पताल की ओर जाने लगे। इमरजेंसी खाली हो गई। हंगामा भी हुआ। परिजनों ने तोड़फोड़ की। बाद में पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा।

लालू ने मांगा नीतीश से इस्तीफा

विपक्ष ने अदालतगंज घाट हादसे को लेकर बिहार सरकार की कटु आलोचना करते हुए नीतीश कुमार से इस्तीफे की मांग की। राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने कहा कि जिस मंत्री ने उस चचरी पुल का उद्घाटन किया था उसे गिरफ्तार किया जाना चाहिए। पुल निर्माण से जुड़े तमाम लोगों पर केस होना चाहिए। डीजीपी अभयानंद के जाने के बाद विपक्ष के नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी पहुंचे और उन्होंने चिकित्सकों को समुचित इलाज को कहा। बाद में उन्होंने पत्रकारों से कहा कि घटना सरकार की विफलता का परिणाम है। राजद नेता रामकृपाल यादव ने कहा कि छठ के पूर्व राज्य के मंत्री घाटों के निरीक्षण के नाम पर फोटो खिंचवाने में व्यस्त थे। हम लोग कह रहे थे इंतजाम नाकाफी हैं। आज यह साबित हो गया।

मृत मान लिए गए पांच जिंदा निकले

पीएमसीएच में मृतक के रूप में रखे गए पांच जिंदा निकल गए। पहले डाक्टरों ने इन्हें मृत समझकर इलाज तक नहीं किया था। परिजनों की पहचान और शव को हटाने की तैयारी में पांच लोगों की सांस चलती पायी गयीं। परिजन घायलों को पीएमसीएच से जबरन अपने कब्ज में लेकर मगध अस्पताल लेकर भागे। पीएमसीएच में परिजनों ने पथराव भी किया। हालांकि इसमें कोई घायल नहीं हुआ है। परिजन प्रशासन के रोकने के बाद भी इंतजार किये बगैर अपने घायल को लेकर मगध अस्पताल लेकर भाग गए। कोई मोटरसाइकिल से तो कोई एम्बुलेंस तो कोई कार से घायलों को लेकर भागते नजर आए। इनमें दो घायल भी पीएमसीएच में चल रहे इलाज से संतुष्ट नहीं होकर निजी अस्पताल की तरफ भाग निकले। पीएमसीएच की इमरजेंसी के पास मृतकों की पहचान के लिए भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी।

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