नई दिल्‍ली [जागरण स्‍पेशल]। चारकोल टूथपेस्ट करने वाले लोग सजग हो जाएं। इससे दांतों को फायदा होने से ज्यादा नुकसान हो सकता है। इस टूथपेस्ट से दांतों में कैविटी होने का खतरा बढ़ सकता है। एक नए अध्ययन में इसके प्रति आगाह किया गया है।

ब्रिटिश डेंटल जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में आगाह किया गया है कि दांतों को चमकाने और सफेद करने के लिए इस्तेमाल होने वाले चारकोल टूथपेस्ट से वास्तव में नुकसान पहुंच सकता है। इस तरह के टूथपेस्ट से कैविटी होने की आशंका बढ़ सकती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि चारकोल टूथपेस्ट के विक्रेता जो दावा करते हैं, उसके पीछे कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं पाया गया है।

कैसे बनता है एक्टिवेटेड चारकोल

चारकोल का शुद्ध रूप कोयला है। इसे लकड़ी को जलाकर बनाया जाता है। इसे बनाने के लिए लकड़ी को 800 से 1200 डिग्री सेल्सियस तापमाना पर बहुत कम ऑक्सीजन की उपस्थिति में जलाया जाता है। इस तरह लकड़ी को जलाने से उसमें से मीथेन, हाइड्रोजन और टार निकल जाते हैं, जिससे इसका वजन 75 प्रतिशत तक कम हो जाता है। इसके बाद जो पदार्थ बचता है वही है चारकोल।

चारकोल यानी कोयले का प्रयोग आमतौर पर ऊर्जा पैदा करने के लिए किया जाता है। ये चारकोल त्वचा के लिए तब फायदेमंद होता है जब इसे एक्टिवेट किया जाता है। चारकोल को एक्टिवेट करने के लिए इसे ज्यादा तापमान में स्टीम किया जाता है और इसमें से अकार्बनिक पदार्थों को बाहर निकाल दिया जाता है। इस प्रक्रिया में चारकोल में छोटे-छोटे छेद हो जाते हैं। इस एक्टिवेट चारकोल का प्रयोग त्वचा की तमाम समस्याओं में किया जाता है।

चारकोल के प्रयोग में सावधानी

चारकोल पाउडर अगर आपके फेफड़ों में चला जाए, तो खतरनाक हो सकता है इसलिए इसके प्रयोग में हमेशा सावधानी बरतें। नाक के पास या मुंह के पास लाकर चारकोल पाउडर का प्रयोग न करें।

लोकसभा चुनाव और क्रिकेट से संबंधित अपडेट पाने के लिए डाउनलोड करें जागरण एप

Posted By: Sanjay Pokhriyal

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप