बेंगलुरु, प्रेट्र। भारत के चंद्रयान-2 ने रविवार को एक और पड़ाव पार कर लिया। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिकों ने शाम छह बजकर 21 मिनट पर सफलतापूर्वक यान की कक्षा में बदलाव किया। चांद की कक्षा में पहुंचने के बाद से यान के पथ में यह पांचवां व अंतिम बदलाव था। अब सोमवार को यान के ऑर्बिटर से लैंडर व रोवर को अलग करने की प्रक्रिया को पूरा किया जाएगा।

छह व सात सितंबर की दरम्यानी रात डेढ़ से ढाई बजे के बीच लैंडर-रोवर चांद की सतह पर उतरेंगे।चंद्रयान-2 को 22 जुलाई को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित किया गया था। तीन हफ्ते पृथ्वी की अलग-अलग कक्षाओं में चक्कर लगाने के बाद इसने चांद की ओर कदम बढ़ाया था। 20 अगस्त को यान ने चांद की कक्षा में प्रवेश किया था। तब से चार बार पथ में बदलाव करते हुए इसे चांद की निकटतम कक्षा में पहुंचाया गया।

चंद्रयान-2 के तीन हिस्से हैं - ऑर्बिटर, लैंडर 'विक्रम' और रोवर 'प्रज्ञान'। सोमवार को दोपहर पौने एक से पौने दो बजे के बीच लैंडर और रोवर को ऑर्बिटर से अलग किया जाना है। इसके बाद ऑर्बिटर करीब सालभर चांद की परिक्रमा करते हुए विभिन्न प्रयोगों को अंजाम देगा। वहीं लैंडर-रोवर धीरे-धीरे चांद की ओर बढ़ते हुए सात सितंबर को वहां के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेंगे। ऐसा होते ही भारत यह उपलब्धि हासिल करने वाला चौथा देश बन जाएगा। इससे पहले अमेरिका, रूस और चीन ने अपने यान चांद पर उतारे हैं। लैंडर-रोवर कुल 14 दिन तक चांद की सतह पर प्रयोग करेंगे। यह अवधि चांद के एक दिन के बराबर है।

कैसे अलग होगा लैंडर

ISRO के एक वैज्ञानिक ने बताया कि ऑसबिटर के ऊपर लगे फ्यूल के एक्सटेंशन में लैंडर और रोवर रखे गए हैं जो कि क्लैंप और बोल्ट से अटैच हैं। उन्होंने बताया कि एक स्प्रिंग के दो तरफ लैंडर और रोवर जुड़े हुए हैं। जिस बोल्ट से स्प्रिंग लगा हुआ है उसे कमांड के जरिए काट दिया जाएगा और लैंडर अलग हो जाएगा।

सॉफ्ट लैंडिंग

7 सितंबर को लैंडर चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा और इसके 4 घंटे बाद रोवर प्रज्ञान बाहर आएगा जो कि चंद्रमा की सतह पर 14 दिनों में कुल 500 मीटर की दूरी तय करेगा। चन्द्रमा के हिसाब से यह एक दिन होगा क्योंकि एक लूनर डे पृथ्वी पर 14 दिनों के बराबर होता है। लैंडर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करेगा। सॉफ्ट लैंडिंग के बाद अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत का नाम भी इस उपलब्धि में शामिल हो जाएगा। चंद्रयान-2 को 22 जुलाई को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया गया था।

भारत का दूसरा चंद्र अभियान
यह भारत का दूसरा चंद्र अभियान है। 2008 में भारत ने चंद्रयान-2 भेजा था। यह एक ऑर्बिटर मिशन था। इसने करीब 10 महीने चांद की परिक्रमा करते हुए विभिन्न प्रयोगों को अंजाम दिया था। चांद पर पानी की खोज का श्रेय भारत के इसी अभियान को जाता है।

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Posted By: Sanjeev Tiwari

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