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CGHS का दायरा बढ़ा: विवाहित और बीमार भाई-बहन भी योजना में शामिल, योगदान राशि में बदलाव नहीं

Published: Thu, 17 Sep 2026 01:33 PM (IST)

केंद्र सरकार ने सीजीएचएस का दायरा बढ़ाकर विवाहित और गंभीर रूप से बीमार भाई-बहनों को राहत दी है, जिसमें योगदान राशि पूरी तरह स्थिर है।

एआई से बनाई गई सांकेतिक तस्वीर।

एआई से बनाई गई सांकेतिक तस्वीर।

HighLights

  1. गोद ली गई बहनों को भी सीजीएचएस में शामिल किया गया।

  2. गंभीर रूप से बीमार विवाहित बेटे-भाई भी अब पात्र होंगे।

  3. लाभार्थियों की संख्या बढ़ने पर भी योगदान नहीं बढ़ेगा।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्रीय सरकारी स्वास्थ्य योजना (CGHS) के दायरे को लगातार और व्यापक बनाया जा रहा है। हाल ही में स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस योजना के नियमों में बड़े बदलाव करते हुए इसके दायरे में कई नए रिश्तों को शामिल किया है।

इसमें सबसे खास बात यह है कि लाभार्थियों की संख्या बढ़ने के बावजूद, कार्डधारकों के मासिक या वार्षिक योगदान में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है, जो कि प्राइवेट हेल्थ इंश्योरेंस से बिल्कुल अलग है।

अब समझिए क्या-क्या नए बदलाव हुए हैं?

बता दें कि स्वास्थ्य मंत्रालय के 7 सितंबर के ऑफिस मेमोरेंडम के अनुसार, अब सीजीएचएस लाभार्थियों के माता-पिता द्वारा कानूनी रूप से गोद ली गई बहनों को भी आश्रित परिवार के सदस्यों के रूप में योजना में शामिल कर लिया गया है।

हालांकि, इन्हें भी जैविक बहनों की तरह ही कुछ शर्तों जैसे कि एक ही घर में रहना, 9000 रुपये प्रति माह से अधिक की आय न होना और अविवाहित/तलाकशुदा/परित्यक्त होना....को पूरा करना होगा।

बीमार बेटे व भाई को भी किया गया शामिल  

इतना ही नहीं बीते 1 सितंबर को जारी आदेश के मुताबिक, अब सीजीएचएस की पात्रता का विस्तार करते हुए उन विवाहित बेटों और भाइयों को भी इसमें शामिल कर लिया गया है, जो गंभीर या असाध्य रूप से बीमार हैं।

पहले क्या नियम थे और अब क्या राहत मिली है?

इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि पहले बेटों और भाइयों के लिए उम्र सीमा तय थी और शादी होते ही उनका नाम सूची से हट जाता था। लेकिन नए नियमों के तहत अब शादी को कवर समाप्त होने का आधार नहीं माना जाएगा, बशर्ते वे गंभीर बीमारी या स्थाई विकलांगता से जूझ रहे हों।

बात अब बादलाव की करें तो अब यह आजीवन कवरेज पुरानी विकलांगता के साथ-साथ क्रोनिक, गंभीर या टर्मिनल बीमारियों पर भी लागू होगा, जिनके कारण कमाने की क्षमता खत्म हो जाती है।

बेटियों और बहनों के लिए नियम क्या हुए बदलाव?

दूसरी ओर आश्रित बेटियों और बहनों के लिए पहले से ही कोई आयु सीमा नहीं थी, लेकिन शादी होने या नौकरी लगने पर कवर बंद हो जाता था। हालांकि, अविवाहित, तलाकशुदा या अलग रह रही बेटियां/बहनें पहले की तरह नियमों का पालन करने पर आजीवन पात्र बनी रहेंगी। शर्त यह है कि वे मुख्य कार्डधारक के साथ सामान्य रूप से निवास करती हों।

अब इस विस्तार के मायने समझिए

गौरतलब है कि आम तौर पर किसी प्राइवेट हेल्थ इंश्योरेंस में परिवार के किसी बुजुर्ग या गंभीर रूप से बीमार सदस्य को जोड़ने पर प्रीमियम की राशि आसमान छूने लगती है। इसके विपरीत, सीजीएचएस में दायरा बढ़ने के बाद भी कार्डधारकों का अंशदान पूरी तरह स्थिर है, उसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है।

दूसरी तरफ चूंकि सीजीएचएस के तहत इलाज के खर्च पर कोई ऊपरी सीमा नहीं है, इसलिए गंभीर रूप से बीमार लोगों को इसमें शामिल करने से सरकारी खजाने पर बड़ा वित्तीय बोझ पड़ सकता है।