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क्रीमी लेयर विवाद: सिविल सेवा अभ्यर्थियों के सेवा आवंटन पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का इंतजार

Published: Mon, 26 Oct 2026 12:00 AM (IST)

केंद्र सरकार अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के सिविल सेवा अभ्यर्थियों की क्रीमी लेयर स्थिति पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का इंतजार कर रही है।

सिविल सेवा अभ्यर्थियों के सेवा आवंटन पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का इंतजार।

सिविल सेवा अभ्यर्थियों के सेवा आवंटन पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का इंतजार।

HighLights

  1. केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का इंतजार कर रही है।

  2. ओबीसी क्रीमी लेयर निर्धारण पर 11 मार्च का फैसला।

  3. सिविल सेवा परीक्षा-2025 के 958 अभ्यर्थियों का मामला।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के सिविल सेवा अभ्यर्थियों की क्रीमी लेयर की स्थिति तय करने के मानदंडों से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के 11 मार्च के फैसले को लागू करने में आ रही चुनौतियों पर केंद्र सरकार शीर्ष अदालत के निर्देशों का इंतजार कर रही है।

कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने निर्देश मांगे हैं कि सरकार को सिविल सेवा परीक्षा-2025 के लिए संघ लोक सेवा आयोग की ओर से अनुशंसित 958 अभ्यर्थियों को सेवा आवंटन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की अनुमति दी जाए। यह आवंटन 11 मार्च के फैसले से पहले लागू ओबीसी क्रीमी लेयर निर्धारण के आधार पर किया जाना है।

डीओपीटी ने यह अर्जी केंद्र सरकार बनाम रोहित नाथन मामले में शीर्ष अदालत के फैसले के बाद दाखिल की है। शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि ओबीसी के आरक्षण के लिए क्रीमी लेयर की स्थिति केवल माता-पिता की आय के आधार पर तय नहीं की जा सकती। अदालत ने यह भी कहा था कि आरक्षण तय करने के लिए समान स्थिति वाले निजी संस्थानों व सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के कर्मचारियों के साथ सरकारी कर्मचारियों से अलग व्यवहार करना भेदभावपूर्ण होगा।

सूत्रों के अनुसार, विभाग और सभी प्रशिक्षण संस्थान सिविल सेवा परीक्षा-2025 के अभ्यर्थियों को सेवाएं आवंटित करने और जल्द से जल्द आधारभूत प्रशिक्षण पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम शुरू होने में देरी का इन अभ्यर्थियों की वरिष्ठता, ग्रेडेशन या अन्य सेवा शर्तों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सिविल सेवा परीक्षा-2025 के नतीजे सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पांच दिन पहले छह मार्च को घोषित किए गए थे।

परिणाम घोषित होने के बाद डीओपीटी ने सुप्रीम कोर्ट के 11 मार्च के फैसले को लागू करने से जुड़ी चुनौतियों की पड़ताल की। इनमें सेवा एवं कैडर आवंटन, मौजूदा वरिष्ठता व ग्रेडेशन, पिछली भर्तियों तथा ओबीसी आरक्षण नीति के क्रियान्वयन पर पड़ने वाले प्रभाव शामिल थे।

इन चुनौतियों को देखते हुए विभाग ने 24 अगस्त को शीर्ष अदालत में विविध आवेदन दाखिल कर फैसले को लागू करने के संबंध में स्पष्टीकरण और निर्देश मांगे। एक बार सेवा आवंटन हो जाने के बाद उसे बदलना मुश्किल होता है, इसलिए डीओपीटी ने आगे बढ़ने से पहले सुप्रीम कोर्ट से निर्देश मांगे हैं।

(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)