नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। पराली की जहरीली हवाएं दिल्ली और आसपास के क्षेत्र को अपने आगोश में लें, इससे पहले केंद्र ने राज्यों को सतर्क कर दिया है। बचाव से जुड़े सभी जरूरी उपायों पर काम शुरु करने को कहा गया है। इसके तहत 20 सितंबर से सभी राज्यों को दिन-प्रतिदिन के आधार पर इसकी निगरानी रखने के भी निर्देश दिए गये हैं। केंद्र ने पराली संकट से निपटने के लिए राज्यों को फसलों की कटाई सीजन शुरु होने से पहले अलर्ट कर दिया है। कटाई का समय आमतौर पर 20 सितंबर से 15 नवंबर तक रहता है।

फसलों की कटाई के साथ ही इस सतर्कता के पीछे केंद्र की वह रणनीति है, जिसके तहत वह किसानों को पहले ही ऐसे कदमों को लेकर जागरूक करना चाहती है। फसलों की कटाई के बाद खेतों को खाली करने की जल्दबाजी में किसान पराली जलाने को ही सबसे आसान रास्ता मानते हैं। जबकि पहले से सतर्कता दिखाई जाने से किसान पराली को जलाने के अलावा दूसरे विकल्पों को भी अपना सकते हैं।

सरकार की ओर से किसानों को पराली को जलाने के अलावा दूसरे तरीकों से नष्ट करने के उपायों के लिए काफी मदद दी गई है। किसानों को जागरूक करने और मशीनी उपकरणों की खरीद के लिए वित्तीय सहायता दी गई है। इसके तहत राज्यों में सोशल मीडिया और दूसरे प्रचार माध्यमों के जरिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। पंजाब जैसे राज्यों में इसे लेकर जागरूकता फैलाने वाले गाने भी तैयार किए गए है।

पर्यावरण मंत्रालय के मुताबिक चालू वित्तीय वर्ष 2018-19 में पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश को पराली से निपटने के लिए करीब छह सौ करोड़ की मदद दी गई है। इनमें सबसे ज्यादा 269 करोड़ की मदद अकेले पंजाब को दी गई है, जहां हर साल करीब 19 मिलियन टन पराली जलाई जाती है।

इसके अलावा करीब 140 करोड़ हरियाणा और करीब 170 करोड़ उत्तर प्रदेश को दिया गया है। मंत्रालय ने इसके अलावा राज्यों में पराली को जलने से रोकने के लिए गठित की गई विशेष टास्क फोर्स को भी सक्रिय करने के लिए कहा गया है। यह टास्क फोर्स राज्यों में ब्लाक स्तर पर गठित की गई है। 

 

Posted By: Vikas Jangra