बिहार-झारखंड और मध्य प्रदेश को केंद्र सरकार की सौगात, तीन नई रेल परियोजनाओं को दी मंजूरी
केंद्र सरकार ने बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश के लिए 9,072 करोड़ रुपये की तीन प्रमुख रेल परियोजनाओं को मंजूरी दी है।

तीन नई रेल परियोजनाओं को दी मंजूरी। (पीटीआई)

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने रेल ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में राज्यों की 9,072 करोड़ रुपये की तीन अहम रेल परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। इनसे सबसे बड़ा फायदा बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश को मिलेगा।
महाराष्ट्र का भी एक हिस्सा इससे जुड़ेगा। इन योजनाओं से रेल नेटवर्क में 307 किलोमीटर की वृद्धि होगी। लगभग 5,407 गांवों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी, जिनकी कुल आबादी करीब 98 लाख है। इन परियोजनाओं को 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य है। सरकार का दावा है कि निर्माण के दौरान स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
व्यस्त रेल मार्गों पर लाइन क्षमता बढ़ाना
तीनों परियोजनाओं का मकसद व्यस्त रेल मार्गों पर लाइन क्षमता बढ़ाना है। बिहार में पुनारख से किऊल के बीच तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाई जाएगी। यह मार्ग पहले से ही काफी व्यस्त है। अतिरिक्त लाइन बनने से ट्रेनों की आवाजाही सुचारु होगी और देरी कम होगी। झारखंड में गम्हरिया से चांडिल तक तीसरी और चौथी लाइन का निर्माण होगा। यह इलाका औद्योगिक गतिविधियों का बड़ा केंद्र है। यहां लाइन क्षमता बढ़ने से मालगाड़ियों की रफ्तार तेज होगी।
तीसरी परियोजना महाराष्ट्र के गोंदिया से मध्य प्रदेश के जबलपुर तक रेल लाइन के दोहरीकरण से जुड़ी है। यह मार्ग मध्य भारत को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी है। दोहरीकरण से यात्री और माल दोनों तरह की ट्रेनों को राहत मिलेगी। इन तीनों परियोजनाओं से चार राज्यों के आठ जिलों में रेल नेटवर्क मजबूत होगा। अतिरिक्त लाइन बनने से रेलवे की परिचालन क्षमता बढ़ेगी। ट्रेनों की समय सारिणी सुधरेगी। माल ढुलाई में तेजी आएगी। अभी कई रूटों पर ट्रैफिक दबाव बहुत ज्यादा है।
मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी को मिलेगा बढ़ाना
परियोजनाएं पीएम गति शक्ति प्लान के तहत तैयार की गई हैं, जिसका मकसद है मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी को बढ़ाना और लॉजिस्टिक लागत कम करना। कोयला, इस्पात, लौह अयस्क, सीमेंट, उर्वरक और खाद्यान्न जैसे सामानों की ढुलाई इन रूटों से होती है। क्षमता बढ़ने पर हर साल 52 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई संभव होगी।
पर्यावरण के लिहाज से भी इसे अहम माना जा रहा है। सड़क परिवहन पर निर्भरता घटेगी। सरकारी अनुमानों के अनुसार करीब 6 करोड़ लीटर तेल आयात में कमी आएगी। कार्बन उत्सर्जन में लगभग 30 करोड़ किलोग्राम की कमी होगी। यह एक करोड़ पेड़ लगाने के बराबर असर माना गया है। पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। जबलपुर का कचनार शिव मंदिर, कान्हा और पेंच राष्ट्रीय उद्यान, धुआंधार जलप्रपात, बरगी बांध और झारखंड का दलमा वन्यजीव अभयारण्य जैसे स्थानों तक पहुंच आसान होगी।
गुजरात मेट्रो को विस्तार की मंजूरी
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गुजरात मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड के तहत जीआईएफटी (गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक) सिटी से शाहपुर तक मेट्रो विस्तार को मंजूरी दी है। यह कारिडोर 1,067.35 करोड़ की लागत से 3.33 किलोमीटर लंबा होगा और इसमें तीन एलिवेटेड स्टेशन बनेंगे। इससे अहमदाबाद और गांधीनगर के बीच संपर्क को और मजबूत होगा।
माना जा रहा है कि 2029 तक रोज करीब 23,702 यात्री और 2041 तक 58,059 यात्री इसका उपयोग करेंगे। निर्माण के दौरान करीब एक हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। संचालन और रखरखाव में भी 250 से ज्यादा लोगों को काम मिलेगा। परियोजना चार वर्षों में पूरी होगी।
