मरीजों को बड़ी राहत: मेडिकल उपकरणों की मनमानी कीमतों पर केंद्र का बड़ा प्रहार, दाम नियंत्रित करने के प्रयास शुरू
एफडीए आयुक्त ने अस्पताल के मेडिकल उपकरणों की कीमतों और एमआरपी के बीच भारी अंतर को लेकर सवाल उठाया था। ...और पढ़ें

मेडिकल उपकरणों की मनमानी कीमतों पर नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार ने शुरू किए प्रयास (सांकेतिक तस्वीर)
HighLights
अस्पतालों में मेडिकल उपकरणों की मनमानी कीमत वसूलने पर एफडीए आयुक्त ने उठाया था सवाल
स्वास्थ्य मंत्री नड्डा ने फार्मास्यूटिकल्स विभाग के सचिव को दिया मेडिकल सेक्टर और अस्पतालों के साथ संवाद के निर्देश
एएनआई, नई दिल्ली। अस्पतालों में मेडिकल उपकरणों की मममानी कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने प्रयास शुरू कर दिए हैं। सरकार ने मेडिकल उपकरणों की कीमतों को तर्कसंगत बनाने के मुद्दे पर मेडिकल सेक्टर और प्राइवेट अस्पतालों के साथ बातचीत शुरू कर दी है।
गौरतलब है कि हाल ही में महाराष्ट्र ड्रग एंड फूड एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) की जांच में सामने आया कि प्राइवेट अस्पताल लोगों से मेडिकल उपकरणों की मनमानी कीमत वसूलते हैं।
एफडीए आयुक्त ने अस्पताल के मेडिकल उपकरणों की कीमतों और एमआरपी के बीच भारी अंतर को लेकर सवाल उठाया था। इससे पहले अगस्त में, स्वास्थ्य संबंधी संसदीय समिति ने भी प्राइवेट अस्पतालों में इलाज के लिए ली जानी वाली की रकम की सीमा तय करने की सिफारिश की थी।
सूत्रों ने बताया, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने फार्मास्यूटिकल्स विभाग के सचिव के साथ बैठक के बाद निर्देश दिया है कि मेडिकल सेक्टर और अस्पतालों के साथ बैठकें और संवाद किया जाए।
हाल ही में एएनआई को दिए साक्षात्कार में दवाओं की कीमतों के नियमन के बारे में मुल्तानी फार्मास्युटिकल्स के सीईओ डॉ. विवेक श्रीवास्तव ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा सभी के लिए है।
केंद्र सरकार ने ड्रग प्राइसेस कंट्रोल ऑर्डर के जरिये इस पर काम करना शुरू कर दिया है ताकि दवाओं को बहुत कम कीमत पर उपलब्ध कराया जा सके।
एम्स कल्याणी के अध्यक्ष डॉ. वाईके. गुप्ता ने कहा, नेशनल लिस्ट आफ एसेंशियल मेडिसिंस (एलएलईएम) में शामिल दवाएं शेड्यूल्ड दवाओं की श्रेणी में आ जाती हैं और उनकी कीमतें नियंत्रित की जाती हैं।
हालांकि, कुछ नॉन-शेड्यूल्ड दवाएं भी होती हैं जिनकी कीमतें फार्मास्युटिकल कंपनियां अपनी सुविधा के अनुसार तय कर सकती हैं। इसी तरह, कई मेडिकल इस्तेमाल की वस्तुओं और उपकरणों, जैसे सिरिंज और ग्लव्स, की कीमतों पर भी कोई असरदार नियंत्रण नहीं है।
नतीजतन, उत्पादन लागत, अस्पताल की लागत और मरीज से ली जाने वाली कीमत में बहुत ज़्यादा अंतर होता है।
उन्होंने कहा, हमारा मकसद गुणवत्ता से समझौता किए बिना मरीजों को शोषण से बचाना है। अस्पतालों का वाजिब मुनाफा कमाना तो ठीक है, लेकिन बेवजह ज़्यादा मुनाफा कमाना गलत है।
मरीज से जो भी कीमत मांगी जाती है, उसे चुकाने के लिए मजबूर होते हैं। पता चला है कि एक जैसी वस्तुओं की कीमत में बाज़ार की एमआरपी के मुकाबले 10 से 20 गुना तक का फर्क होता है। ऐसी हरकतों पर असरदार तरीके से रोक लगनी चाहिए।
