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CEC ज्ञानेश कुमार कब होंगे रिटायर, उनके बाद किसकी बारी? जानिए कैसे चुना जाता है देश का 'मुख्य चुनाव आयुक्त'

Published: Thu, 24 Sep 2026 05:00 PM (IST)Updated: Thu, 24 Sep 2026 05:29 PM (IST)

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार SIR अभियान के फैसलों को लेकर विपक्ष के निशाने पर हैं, जिससे उनके इस्तीफे की ...और पढ़ें

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और भारतीय चुनाव आयोग बड़े सियासी घमासान के केंद्र में हैं। SIR अभियान के दौरान लिए गए फैसलों को लेकर अब विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहा है।

एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के बाद आयोग के अंदर चल रहे आंतरिक मतभेदों को खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार SIR प्रक्रिया से जुड़े फैसलों और आदेशों पर आधिकारिक रूप से आपत्तियां जताईं।

इन आपत्तियों में मतदाता पंजीकरण, फॉर्म-6 में बदलाव और मतदाता सूची डेटाबेस का केंद्रीकरण जैसे मुद्दे शामिल थे।

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कौन हैं CEC ज्ञानेश कुमार?

उत्तराखंड कैडर के 1988 बैच के आईएएस (IAS) अधिकारी ज्ञानेश कुमार ने फरवरी 2025 में भारत के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में पदभार संभाला था। उनका कार्यकाल 26 जनवरी 2029 तक रहेगा।

उन्होंने आईआईटी (IIT) कानपुर से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। इसके अलावा, उन्होंने इन्स्टिट्यूट ऑफ चार्टर्ड फाइनेंशियल एनालिस्ट्स ऑफ इंडिया (ICFAI) से बिजनेस फाइनेंस और अमेरिका की प्रतिष्ठित हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से एनवायर्नमेंटल इकोनॉमिक्स की डिग्री हासिल की है।

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अपने प्रशासनिक करियर की शुरुआत में उन्होंने केरल सरकार में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। केंद्र सरकार में आने के बाद उन्होंने रक्षा मंत्रालय में संयुक्त सचिव तथा गृह मंत्रालय (MHA) में संयुक्त सचिव और अतिरिक्त सचिव के पद पर जिम्मेदारियां निभाईं। बाद में वे संसदीय कार्य मंत्रालय और सहकारिता मंत्रालय में सचिव भी रहे।

गृह मंत्रालय में अपने कार्यकाल के दौरान ज्ञानेश कुमार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को हटाने के बाद के प्रशासनिक निर्णयों और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन की प्रक्रिया में बेहद अहम भूमिका निभाई थी।

ज्ञानेश कुमार के बाद कौन होगा CEC?

वर्तमान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का कार्यकाल समाप्त होने के बाद, वरिष्ठता के आधार पर चुनाव आयुक्त विवेक जोशी के भारत के अगले मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) बनने की संभावना है।

विवेक जोशी हरियाणा कैडर के 1989 बैच के IAS अधिकारी हैं और इससे पहले हरियाणा के मुख्य सचिव के रूप में सेवा दे चुके हैं। उनकी नियुक्ति भी संसद द्वारा 2023 में पारित नए कानूनी प्रावधानों और तय चयन प्रक्रिया के तहत ही की जाएगी।

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कैसे होती है मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति?

संसद द्वारा दिसंबर 2023 में पास किए गए कानून के तहत तय की गई प्रक्रिया के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति की जाती है। सर्च कमेटी योग्यता के आधार पर 5 उम्मीदवारों के नाम शॉर्टलिस्ट करती है।

इस कमेटी में कानून मंत्री की अध्यक्षता वाली इस समिति में भारत सरकार के दो सचिव स्तर के अधिकारी होते हैं।

इसके बाद शॉर्टलिस्ट किए गए नामों में से अंतिम नाम तय करने के लिए एक तीन-सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति बैठती है। इसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता, प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं।

चयन समिति की सिफारिश के आधार पर राष्ट्रपति आधिकारिक तौर पर नियुक्ति की मंजूरी देते हैं।

बता दें कि 2023 से पहले मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति सीधे तौर पर भारत के राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रिपरिषद की सलाह पर की जाती थी।

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नई चयन प्रक्रिया पर भी है विवाद

ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति के समय से ही इस चयन प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं। दरअसल, मार्च 2023 में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ (अनूप बरनवाल बनाम भारत सरकार) ने फैसला सुनाते हुए कहा था कि जब तक संसद कोई नया कानून नहीं बनाती, तब तक नियुक्ति पैनल में प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) शामिल होंगे।

हालांकि, केंद्र सरकार ने दिसंबर 2023 में नया कानून बनाकर पैनल से CJI को बाहर कर दिया और उनकी जगह एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री को शामिल कर लिया।

विपक्ष का तर्क यह है कि इस नई व्यवस्था में 3 में से 2 सदस्य सीधे तौर पर केंद्र सरकार के होते हैं, जिससे बहुमत हमेशा सत्तापक्ष के पास रहता है और विपक्ष के नेता की असहमति का कोई व्यावहारिक असर नहीं पड़ता।

इस नए कानून की संवैधानिक वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। सितंबर 2026 में सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच ने इस पर एक विभाजित फैसला सुनाया।