नई दिल्ली, जेएनएन। सीबीआइ मामले पर पूर्व सीजेआइ आरएम लोढ़ा (R M Lodha) ने कहा कि जांच एजेंसियों को राजनीति से अलग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश की प्रमुख जांच एजेंसियों को स्वतंत्रता दी जानी चाहिए, अब समय आ गया है कि इन्हें राजनीतिक तंत्र से अलग किया जाए, जबतक राजनीति से यह जुड़ीं रहेंगी, तब तक इस तरह की चीजें सामने आती रहेंगी।

आलोक वर्मा ने पद से दिया इस्तीफा

बता दें कि सीबीआइ के पूर्व निदेशक आलोक वर्मा ने शुक्रवार को अपने पद से इस्‍तीफा दे दिया। सीबीआइ प्रमुख पद से हटाकर आलोक वर्मा (Alok Verma) को फायर सर्विसेस का डीजी बनाया गया था। इधर आलोक वर्मा की ओर से जारी किए गए सभी ट्रांसफर आदेशों को सीबीआइ के अंतरिम चीफ नागेश्वर राव ने पलट दिया है।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिलने के बाद दो दिन पहले ही आलोक वर्मा ने सीबीआइ निदेशक का पदभार संभाला था, लेकिन प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय चयन समिति ने उन्हें दोबारा पद से हटाने का फैसला लिया। इन दो दिनों के भीतर आलोक वर्मा ने कई ट्रांसफर के फैसले लिए, जिन्हें अब रद कर दिया गया है।

जानिए क्या है मामला

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजने के सरकारी आदेश को मंगलवार को रद कर दिया था। आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच तकरार शुरू होने के बाद सरकार ने दोनों को छुट्टी पर भेज दिया था और उनके सारे अधिकार छीन लिए गए थे। आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना को छुट्टी पर भेजने के बाद 1986 बैच के ओडिशा काडर के आइपीएस अधिकारी नागेश्वर राव को 23 अक्टूबर, 2018 को सीबीआइ निदेशक के दायित्व और कार्य सौंपे गए थे।

अधिकारियों के अनुसार, दायित्व मिलते ही अगली सुबह राव ने बड़े पैमाने पर तबादले किए। उनमें अस्थाना के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले की जांच करने वाले अधिकारी जैसे डीएसपी एके बस्सी, डीआईजी एम के सिन्हा, संयुक्त निदेशक एके शर्मा भी शामिल थे। जब अलोक वर्मा की पद पर बहाली हुई, तो उन्होंने उन्होंने भी बड़े स्तर पर तबादले किए। एक अधिकारी ने पहचान उजागर नहीं करने की शर्त पर बताया कि आलोक वर्मा ने बुधवार को अपना दायित्व संभाल लिया और राव द्वारा किए गए सभी तबादले रद कर दिए थे।

Posted By: Arti Yadav

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप