जागरण न्यूज नेटवर्क, लखनऊ। कुंडा कांड की जांच करने सीबीआइ टीम शुक्रवार को प्रतापगढ़ के कुंडा कस्बे में पहुंच गई। सबसे पहले उसने कुंडा नगर पंचायत कार्यालय का दौरा किया। इसके बाद बलीपुर के घटनास्थलों का मुआयना किया।

सीबीआइ ने राजा भैया सहित घटना से जुड़े 23 लोगों के काल डिटेल रिकार्ड (सीडीआर) हासिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सीबीआइ डीएसपी का शव कब्र से निकलवाकर उसका दोबारा पोस्टमार्टम भी करवा सकती है। लेकिन इससे पहले एजेंसी ने प्रतापगढ़ के एसपी से जिया उल हक के पोस्टमार्टम के दौरान बनाई गई सीडी मांगी है। हथिगवां थाना क्षेत्र के बलीपुर गांव में दो मार्च को प्रधान नन्हे यादव, उसके भाई सुरेश यादव और डीएसपी जिया उल हक की हत्या मामले की जांच के सिलसिले में डीआइजी अनुराग गर्ग के नेतृत्व में सीबीआइ की दस सदस्यीय टीम कुंडा आई।

दोपहर 12 बजे टीम के सदस्य कुंडा स्थित नगर पंचायत कार्यालय पहुंचे। वहां कागजात खंगालने के दौरान डीआइजी गर्ग ने डीएम व एसपी से घटना के आरोपी नगर पंचायत अध्यक्ष गुलशन यादव के बारे में पूछताछ की। एसपी ने गुलशन की आपराधिक पृष्ठभूमि होने की जानकारी दी।

घटना के बाद से ही गुलशन फरार हैं। यहां से कुछ कागजात व रजिस्टर कब्जे में लेने के बाद टीम करीब पौने दो बजे बलीपुर पहुंची। सबसे पहले बलीपुर चौराहे पर प्रधान की हत्या का घटनास्थल देखा। हत्या को लेकर सीबीआइ अधिकारियों ने स्थानीय अधिकारियों से सवाल किए। कुछ मिनट वहां रुकने के बाद टीम प्रधान के घर पर होते हुए उस स्थान पर पहुंची, जहां डीएसपी की हत्या हुई थी। यहां करीब 15 मिनट रुककर जायजा लिया। फिर सुरेश की हत्या वाले घटनास्थल को देखा। वह खेत भी देखा जहां भगोड़े पुलिस वालों ने छिपकर जान बचाई थी। वहां से टीम सदस्य प्रधान व उनके भाई की हत्या के आरोपी कामता पाल के घर पहुंचे। इस दौरान प्रधान और आरोपी के परिजनों से कोई बात नहीं की गई। इसके बाद सीबीआइ टीम कुंडा रवाना हो गई। कुंडा पहुंचकर गेस्ट हाउस में घटना को लेकर डीएम विद्याभूषण, एसपी एलआर कुमार, डीएसपी सदर सुधीर जायसवाल से सीबीआइ अधिकारियों ने बातचीत की। जिलाधिकारी विद्याभूषण ने बताया कि सीबीआइ टीम को घटनाक्रम से अवगत करा दिया गया है। हत्याकांड से संबंधित कागजात उपलब्ध करा दिए गए हैं। अब टीम अपने स्तर से जांच करेगी। एएसपी आशाराम यादव ने बताया कि सीबीआइ टीम को एक दफ्तर की जरूरत थी।

नगर पंचायत कार्यालय में उनका दफ्तर बनाया गया है। घटना में कानूनी दांवपेच के जानकार शामिल सीबीआइ डीएसपी की सर्विस रिवॉल्वर, बुलेट और मोबाइल के गायब होने की थ्योरी पर खास ढंग से काम कर रही है। जिस शातिराना ढंग से डीएसपी का सामान गायब किया गया, उसका मकसद साक्ष्य मिटाना ही है। सीबीआइ का आकलन है कि घटना को अंजाम देने में कानूनी दांव-पेंच से वाकिफ कुछ लोग शामिल हैं। परवीन बनी ओएसडी उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रतापगढ़ में मारे गए डीएसपी जिया उल हक की पत्नी परवीन आजाद को विशेष कार्याधिकारी (ओएसडी) पुलिस कल्याण और जिया उल हक के भाई सोहराब अली को सिपाही के पद पर नियुक्त कर दिया है।

उल्लेखनीय है परवीन आजाद की पुलिस उपाधीक्षक पद पर तैनाती की मांग उठ रही थी, लेकिन यह पद लोक सेवा आयोग से सृजित होने के कारण उस पर सीधे तैनाती संभव नहीं है। ऐसे में समकक्ष वेतनमान में परवीन को विशेष कार्याधिकारी का ओहदा दिया गया है। इसके पहले भी विभिन्न घटनाओं में मारे गए पुलिस अधिकारियों की पत्नियों को ओएसडी का ही ओहदा दिया गया है।

राजा भैया समर्थकों ने फूंका आजम का पुतला

राजा भैया के खिलाफ से उनके समर्थकों का गुस्सा फूट पड़ा है। उन्होंने इस सबके पीछे नगर विकास मंत्री आजम खां को जिम्मेदार मानते हुए शुक्रवार को उनके खिलाफ जमकर नारेबाजी की और उनका पुतला फूंका।

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