नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। विदेशी अनुदान नियमन कानून (FCRA) के उल्लंघन के आरोप में अंतरराष्ट्रीय एनजीओ एमनेस्टी इंडिया पर सीबीआइ का शिकंजा कस गया है। एमनेस्टी इंडिया पर FCRA का लाइसेंस नहीं मिलने के बाद FDI के मार्फत विदेश से फंड जुटाने और उसका एनजीओ की गतिविधियों में उपयोग करने का आरोप है। गृहमंत्रालय ने सीबीआइ को एमनेस्टी इंडिया के खिलाफ एफसीआरए के उल्लंघन की जांच करने को कहा था।

अनुमति के बिना ही 2015 में 10 करोड़ रुपये FDI के रूप में भेजा

उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार एफआइआर दर्ज करने के बाद सीबीआइ ने बेंगलुरू स्थिति एमनेस्टी से जुड़े एमनेस्टी इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड, इंडियंस फॉर एमनेस्टी इंटरनेशनल ट्रस्ट, एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया फाउंडेशन ट्रस्ट और एमनेस्टी इंटरनेशनल साउथ एशिया फाउंडेशन के ठिकानों की तलाशी ली। आरोप है कि लंदन स्थित एमनेस्टी इंटरनेशनल (यूके) इनमें एफसीआरए की अनुमति के बिना ही 2015 में 10 करोड़ रुपये एफडीआइ के रूप में भेजा था। बाद इस एफडीआइ को फिक्स्ड डिपोजिट कर दिया गया और उस फिक्स्ड डिपोजिट पर 14.25 करोड़ रुपये का ओवरड्राफ्ट की सुविधा ले ली गई। बाद में इस ओवरड्राफ्ट के माध्यम से पैसे निकालकर एनजीओ की गतिविधियों में खर्च किया गया। यही नहीं, ब्रिटेन स्थिति अन्य माध्यमों से भी बेंगलुरू स्थित एमनेस्टी इंडिया से जुड़ी इकाइयों में अलग से 26 करोड़ रुपये आए थे। जिनका इस्तेमाल भी एनजीओ की गतिविधियों किया गया।

छापे में कई अहम दस्तावेज बरामद

सीबीआइ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि एफसीआरए में स्पष्ट प्रावधान है कि एनजीओ की गतिविधियों के लिए बिना एफआइआरए लाइसेंस के लिए कोई भी विदेशी सहायता नहीं ली जा सकती है। जबकि एमनेस्टी इंडिया साफ तौर पर एफडीआइ और अन्य माध्यम से विदेशी सहायता लाकर एनजीओ की गतिविधियों में खर्च कर रहा था। उन्होंने कहा कि छापे में कई अहम दस्तावेज बरामद किये गए हैं और जल्दी एमनेस्टी के पदाधिकारियों से इस संबंध में पूछताछ की जाएगी।

एमनेस्टी इंडिया ने दिया बयान

उधर, मानवाधिकार वाचडाग ने एक बयान जारी कर कहा है कि बीते वर्षों में प्रताड़ित करने की एक परिपाटी शुरू हुई है। एमनेस्टी इंडिया जब भी भारत में मानवाधिकार उल्लंघन के खिलाफ आवाज उठाता है, तब इसे प्रताड़ित किया जाता है। उसने कहा है कि वह भारतीय और अंतरराष्ट्रीय कानून का पूरी तरह से पालन करेगा। भारत में हमारा काम वैसा ही है जैसा यह कहीं भी है। वैश्विक मानवाधिकार के लिए वह लड़ता है।

उन्‍होंने कहा कि हम भारतीयों और यहां के कानून के पूरी तरह से अनुपालन में खड़े हैं। भारत या कहीं और हमारा काम सार्वभौमिक मानव अधिकारों के लिए लड़ना हमारा काम है। ये वही मूल्य हैं जो भारतीय संविधान में निहित हैं और बहुलवाद, सहिष्णुता और असंतोष की एक लंबी और समृद्ध भारतीय परंपरा से प्रवाहित होते हैं।

 

Posted By: Arun Kumar Singh

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