मुंबई, एएनआइ। केंद्रीय जांच ब्यूरो( सीबीआइ) ने शीना बोरा हत्याकांड में इंद्राणी मुखर्जी की लाई डिटेक्टर टेस्ट कराने संबंधित मांग पर सीबीआई ने मंगलवार को अपना जवाब दाखिल किया है। सीबीआइ ने कोर्ट के समक्ष कहा है कि उसे इंद्राणी मुखर्जी पर पॉलीग्राफ टेस्ट की कोई आवश्यकता नहीं है। सरकारी वकील भरत बादामी ने इसकी जानकारी जज जे.सी. जगदाले की अदालत को दी है। सरकारी वकील ने कहा कि सीबीआइ ने पूरी जांच की है अब लाई डिटेक्टर टेस्ट कराने की कोई जरुरत नहीं है।

मुखर्जी ने फरवरी में दो पेज की हाथ से लिखा एक प्रार्थना पत्र सीबीआइ कोर्ट को दिया था। इंद्राणी ने कोर्ट से पॉलीग्राफ टेस्ट कराने की मांग की थी। उन्होंने याचिका में कहा था कि न्याय के लिए वह पॉलीग्राफ टेस्ट कराना चाहती हैं। कोर्ट में दाखिल अपने जवाब में सीबीआइ ने कहा है कि वह इस मामले में पूरी जांच की है और 35 गवाहों के बयान भी दर्ज किए हैं। इसलिए अब पॉलीग्राफ टेस्ट की कोई जरुरत नहीं है।

इंद्राणी मुखर्जी अपनी बेटी शीना बोरा की हत्या के मामले में मुंबई की भायखला जेल में बंद हैं। इंद्राणी को 2015 में गिरफ्तार किया गया था। साल 2012 में 24 अप्रैल को शीना बोरा की हत्या हुई थी। इस हत्‍या का खुलासा साल 2015 में हुआ, जब इंद्राणी के ड्राइवर श्यामवर राय को हथियार रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। इंद्राणी पर आरोप है कि उसने अपने पूर्व पति संजीव खन्ना और ड्राइवर श्याम राय के साथ मिलकर इंद्राणी की पूर्व शादी से हुई बेटी शीना की हत्या कर दी थी। 25 अप्रैल को उसकी लाश को डिस्पोज कर दिया गया।

क्या है पॉलीग्राफ टेस्ट?
इस तकनीक का सहारा झूठ पकडऩे के लिए लिया जाता है। टेस्ट का मकसद ये जानना होता है कि व्यक्ति सच बोल रहा है या झूठ। जिस व्यक्ति की पॉलीग्राफ की जाती है। उसके साथ सेंसर अटैच किए जाते हैं। मशीन मुख्यत: व्यक्ति के सांस लेने की गति, पल्स रेट, ब्लड प्रेशर, हाथ-पांव की मूवमेंट व शरीर से निकल रहे पसीने को रिकॉर्ड करती है।

Posted By: Mangal Yadav