नई दिल्ली/ लखनऊ,जेएनएन। उन्नाव दुष्कर्म मामले की पीडि़ता और उसके वकील के साथ हुई सड़क दुर्घटना की जांच पूरी करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआइ को छह सितंबर तक का समय दे दिया है। इस दुर्घटना में पीड़िता और उसका वकील गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जबकि पीड़िता की दो रिश्तेदारों की मौत हो गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले इस मामले की जांच पूरी करने के लिए सीबीआइ को दो हफ्ते का समय प्रदान किया था।

सोमवार को जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की पीठ ने छह सितंबर तक की मोहलत देते हुए कहा कि सीबीआइ ने अभी तक इस मामले की काफी व्यापक जांच की है। हालांकि सीबीआइ ने जांच पूरी करने के लिए शीर्ष अदालत से चार हफ्ते का समय मांगा था। जांच एजेंसी का कहना था कि अभी तक दुष्कर्म पीडि़ता और उसके वकील का बयान दर्ज नहीं हो पाया है और वे जांच के दौरान एकत्रित कुछ इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का विश्लेषण भी करना चाहते हैं।

इस मामले में न्यायमित्र वी. गिरी ने पीठ को बताया कि सड़क दुर्घटना में घायल वकील की हालत बेहद गंभीर है और उसका इलाज चल रहा है। शीर्ष अदालत को कुछ रकम वकील को देने पर विचार करना चाहिए। इससे वकील के परिवार की मदद हो जाएगी। गिरी की दलील पर सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को पीडि़ता के वकील की पत्नी को तीन दिन के भीतर पांच लाख रुपये प्रदान करने का निर्देश दिया।

मालूम हो कि एक अगस्त को शीर्ष अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार को अंतरिम सहायता के रूप में 25 लाख रुपये की राशि दुष्कर्म पीडि़ता की मां को भी देने का आदेश दिया था।सुनवाई के दौरान पीठ ने दुष्कर्म पीडि़ता के परिवार के सदस्यों द्वारा मीडिया में दिए गए बयानों पर नाराजगी जताते हुए कहा, 'अगर आपको कोई परेशानी है तो निसंकोच होकर हमें बताइए। हम यहां आपकी मदद के लिए ही हैं। उसके परिवार के कुछ लोग मीडिया में जा रहे हैं। इससे आरोपित को मदद मिल सकती है।' पीठ अब मामले की अगली सुनवाई छह सितंबर को करेगी।

अभी नहीं आई दोनों की लाई डिटेक्टर और ब्रेन मैपिंग टेस्ट की रिपोर्ट
सीबीआइ अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि उन्नाव दुष्कर्म कांड की पीड़िता और उसके वकील की कार को टक्कर मारने वाले ट्रक के ड्राइवर और हेल्पर का नार्को एनालिसिस टेस्ट करवाया जा सकता है। इसके लिए उनकी हिरासत की मांग भी की जा सकती है।

अधिकारियों ने बताया कि सीबीआइ ने दोनों का अपने कार्यालय में लाई डिटेक्टर टेस्ट और गुजरात में गांधीनगर की फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी में ब्रेन मैपिंग टेस्ट कराया था, लेकिन दोनों की रिपोर्ट अभी नहीं आई है। जांच एजेंसी अभी दुष्कर्म पीडि़ता और उसके वकील का बयान भी दर्ज नहीं कर पाई है क्योंकि दोनों का दिल्ली स्थित एम्स में इलाज चल रहा है और डॉक्टरों के मुताबिक वे अभी बातचीत करने की हालत में नहीं हैं।

हत्या के मामले में सीबीआइ ला सकती है अतिरिक्त आरोपपत्र
उन्नाव कांड में दुष्कर्म पीडि़ता के पिता की हत्या के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) अतिरिक्त आरोपपत्र दाखिल कर सकता है। सोमवार को सुनवाई के दौरान तीस हजारी अदालत के प्रगति रिपोर्ट मांगने पर जांच एजेंसी ने बताया कि कुछ साक्ष्य जुटाए गए हैं और एक सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट दाखिल की जाएगी। पीडि़ता के पिता पर हमला और हिरासत में मौत के मामले का संयुक्त ट्रायल अदालत 22 अगस्त से शुरू करेगी।

अदालत ने दोनों मामलों को जोड़ते हुए विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और नौ अन्य पर आरोप तय किए थे। अभी तक सीबीआइ की तरफ से दायर आरोपपत्र में सेंगर हत्या के मामले में आरोपित नहीं है। जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि ट्रायल के दौरान सेंगर के खिलाफ साक्ष्य मिलने पर अतिरिक्त आरोपपत्र दाखिल किया जाएगा।

सीबीआइ गवाह की हत्या मामले में चाचा की जमानत मंजूर
उप्र के उन्नाव (माखी) दुष्कर्म पीड़िता के चाचा पर विचाराधीन सात मामलों में सोमवार को अलग-अलग अदालतों में सुनवाई हुई। कोर्ट ने एक मामले में चाचा को जमानत देकर कुछ राहत दी जबकि एक अन्य मामले को जिला जज की कोर्ट भेज दिया। इसके अलावा पांच अन्य मामलों में कोर्ट ने आगे की तारीख दे दी। उसे कड़ी सुरक्षा के बीच दिल्ली पुलिस तिहाड़ जेल से उन्नाव लेकर आई थी।

पेशी के बाद उसे वापस दिल्ली भेज दिया गया। पीड़िता के चाचा को जीआरपी उन्नाव में दर्ज लूट, माल बरामदगी और आ‌र्म्स एक्ट के दो मामलों में ज्युडीशियल मजिस्ट्रेट की कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने 45 मिनट तक आरोपित चाचा के साथ ही एक अन्य आरोपित के भी बयान लिए और अंतिम बहस के लिए 30 अगस्त की तारीख तय की। इसके बाद उसे एसीजेएम तृतीय की कोर्ट लाया गया। वहां माखी थाने में दर्ज सीबीआइ गवाह की हत्या की झूठी सूचना देने के मुकदमे में जमानत पर सुनवाई हुई।

 

Posted By: Dharmendra Pandey

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