नई दिल्ली, प्रेट्र। देश से फरार उद्योगपति विजय माल्या को लुकआउट नियमों में ढील देने वाले दस्तावेजों को सार्वजनिक करने से सीबीआइ ने इनकार कर दिया है। माल्या ने विभिन्न बैंकों के 9000 करोड़ रुपये नहीं चुकाए हैं और वह भागकर ब्रिटेन चला गया है। माल्या के इस कृत्य पर अदालत ने उसे भगोड़ा घोषित किया है।

पुणे निवासी विहार दुर्वे की आरटीआइ पर मांगी गई सूचना पर सीबीआइ ने सेक्शन 8 (1) का हवाला देते हुए जानकारी देने से इनकार कर दिया है। यह सेक्शन सीबीआइ को जांच और कार्रवाई के दौरान की सूचनाओं को सार्वजनिक न करने का अधिकार देता है।

माल्या के मामले में पहले जारी लुकआउट दस्तावेज में उसे देश से बाहर जाने से रोकने के हवाई अड्डों को निर्देश थे। जबकि बाद में निर्देश को बदलकर माल्या के देश के बाहर जाने की केवल सूचना देने तक सीमित कर दिया गया था। इसी का लाभ लेकर माल्या देश छोड़कर जाने में सफल हो गया।

सीबीआइ ने निर्देश में इस बदलाव को स्वीकार किया था लेकिन यह नहीं बताया था कि यह बदलाव किसके निर्देश पर हुआ। अब जबकि सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी गई है तो देश की शीर्ष जांच एजेंसी ने कानून का हवाला देकर जानकारी देने से इनकार कर दिया है।

हालांकि दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने एक आदेश में स्पष्ट किया है कि सरकारी सेवा का कोई अधिकारी जब इस कानूनी प्रावधान का लाभ लेकर सूचना देने से बचेगा तो उसे उसके लिए पर्याप्त कारण बताने होंगे। सीबीआइ ने माल्या के लिए निर्देश में रियायत वाला यह बदलाव तब किया था जबकि कर्ज वापस न करने के सिलसिले में भगोड़े उद्योगपति के साथ एजेंसी पूछताछ कर चुकी थी।

Posted By: Tanisk