नई दिल्ली, एएनआइ। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आलोक वर्मा बुधवार को निदेशक के रूप में कार्यभार संभालने के लिए सीबीआइ दफ्तर पहुंचे, हालांकि अगले एक हफ्ते तक वह कोई नीतिगत फैसला नहीं ले पाएंगे। मंगलवार को शीर्ष न्यायलय ने आलोक वर्मा को बड़ी राहत देते हुए उन्हें काम पर बहाल कर दिया था।

कोर्ट ने कहा था कि आलोक वर्मा पर कार्रवाई या कामकाज वापस लेने के बारे में निदेशक का चयन करने वाली उच्च स्तरीय समिति सात दिन के भीतर विचार करेगी और जब तक समिति मामले पर विचार करती है, तब तक आलोक वर्मा कोई बड़ा नीतिगत फैसला नहीं लेंगे सिर्फ सीबीआइ का रुटीन कामकाज ही देखेंगे।

रंजन गोगोई ने आलोक वर्मा के मामले मे विचार करने वाली हाई पावर चयन समिति में दूसरे नंबर के वरिष्ठतम जज एके सीकरी को नामित किया। बता दें कि कमेटी मे प्रधानमंत्री, नेता विपक्ष और सीजेआइ होते हैं, लेकिन जस्टिस गोगोई ने ही वर्मा का फैसला लिखा है, इसलिए वे इस समिति के सदस्य नहीं होंगे।

जानिए क्या था मामला
बता दें कि सीबीआइ में शीर्ष पदों पर तैनात दो अफसरों में झगड़ा सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने दोनों को छुट्टी पर भेज दिया गया था। जिसके बाद सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के फैसले को गलत ठहराते हुए कहा कि उनके पास ये फैसला लेने का अधिकार नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अफसरों के बीच को झगड़े के अलावा केंद्र को सीबीआइ निदेशक के पद की गरिमा का भी ध्यान रखना चाहिए। इस प्रकार का फैसला सिर्फ उच्च स्तर की कमेटी ही ले सकती है, जिसमें प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस और लोकसभा में विपक्ष के नेता शामिल होते हैं।

आलोक वर्मा को पूर्ण रूप से राहत नहीं
हालांकि, अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट में आलोक वर्मा को पूर्ण रूप से राहत नहीं दी है। कोर्ट के फैसले के अनुसार, आलोक वर्मा पर जो भ्रष्टाचार संबंधी आरोप हैं, उसपर उच्च स्तरीय कमेटी फैसला लेगी। इस कमेटी को एक सप्ताह के अंदर अपना फैसला सुनाना होगा, तबतक आलोक वर्मा कोई बड़ा फैसला नहीं ले पाएंगे।

Posted By: Arti Yadav

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