नई दिल्ली, प्रेट्र। अगस्ता वेस्टलैंड मामले में बिचौलिये की भूमिका निभाने वाले क्रिश्चियन माइकल जेम्स के खिलाफ सीबीआइ कोई भी साक्ष्य नहीं जुटा सकी है। आरोपी ब्रिटिश मूल का है, लेकिन फिलहाल यूएई में रह रहा है। प्रत्यर्पण के लिए सीबीआइ को वहां की कोर्ट में माइकल के खिलाफ पुख्ता साक्ष्य जमा कराने थे। उसके बाद ही अदालत को फैसला करना था।

माइकल की वकील रोजमेरी डोस एंजोस का कहना है कि कोर्ट ने साक्ष्य जमा कराने की अंतिम तिथि 19 मई तय की थी। उसके बाद भी भारत सरकार को 45 दिन का समय दिया गया था। अलबत्ता इसमें से भी 30 दिन बीत चुके हैं और सरकार खामोश है। उनका दावा है कि माइकल के खिलाफ न तो इटली में कोई साक्ष्य है और न ही भारत व स्विटजरलैंड में। उन्होंने माना कि एक माह पहले उनके मुवक्किल से सीबीआइ ने पूछताछ की थी। ध्यान रहे कि ईडी ने जनवरी में माइकल के प्रत्यर्पण को लेकर यूएई की कोर्ट में अपील की थी।

भारत की अदालतों में उसके खिलाफ सीबीआइ व ईडी आरोप पत्र दाखिल कर चुकी हैं। उसके गैर-जमानती वारंट भी जारी किए जा चुके हैं। सीबीआइ की अपील पर इंटरपोल उसके व दो अन्य आरोपियों कार्लो गेरोसा व गाइडो हसके के लिए रेड कार्नर नोटिस भी जारी कर चुकी है।

आरोप है कि माइकल ने अगस्ता वेस्टलैंड सौदे को सिरे चढ़ाने की एवज में 235 करोड़ रुपये हासिल किए थे। भारत में उसका आना-जाना लगा रहता था और 1997 से 2013 तक वह तकरीबन 300 मर्तबा भारत आया था। उसे रिश्वत की रकम का भुगतान एक वेब कंपनी के जरिये किया गया था। यह रकम कंसलटेंसी के नाम पर दी गई थी।

सीबीआइ ने अपने आरोप पत्र में वायु सेना के पूर्व प्रमुख एसपी त्यागी, उनके भतीजे संजीव त्यागी के साथ वायु सेना के तत्कालीन उप प्रमुख जेएस गुजराल व वकील गौतम खेतान को मुख्य आरोपी बनाया है। आरोप है कि सभी ने इस सौदे में रिश्वत ली थी।

 

Posted By: Bhupendra Singh