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174 जिंदगियों के लिए संकटमोचक बने कैप्टन स्मित, पीएम मोदी को बताया अपना आदर्श

Published: Fri, 02 Oct 2026 08:01 PM (IST)

भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार ने फ्लाईदुबई फ्लाइट को दुर्घटनाग्रस्त होने से बचाकर 174 जिंदगियां बचाईं। प्रधानमंत्री मोदी ने उनसे ...और पढ़ें

कैप्टन स्मित ने पीएम मोदी को बताया अपना आदर्श

कैप्टन स्मित ने पीएम मोदी को बताया अपना आदर्श

HighLights

  1. कैप्टन स्मित मच्छार ने फ्लाईदुबई फ्लाइट में 174 जिंदगियां बचाईं।

  2. प्रधानमंत्री मोदी ने कैप्टन के साहस और सूझबूझ की सराहना की।

  3. कैप्टन स्मित ने संकट में हनुमान चालीसा का पाठ कर शक्ति पाई।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। भवायह मौत से मुकाबले में जिंदगियों की जीत की ये कुछ मिनटों की कहानी बरसों-बरस याद की जाएगी। स्वाभाविक है कि दुनिया इस कल्पना से ही सिहर जाए कि काल-दूत बने ओमान के को-पायलट के मंसूबे सफल हो जाते तो क्या होता?

लेकिन शायद तब-तब सभी के कानों में 174 जिंदगियों के लिए संकटमोचक बने भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार के वह शब्द भी अवश्य गूंजेंगे, जो उन्होंने घटना के समय की मनोदशा बताने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ वीडियो कॉल पर साझा किए।

वह बोले- उस समय मुझे इतना पता था कि मैं उन सबको मरने नहीं दे सकता...। ये शब्द एक हिंदुस्तानी के शौर्य और पराक्रम की गाथा सुनाते हैं।

वहीं, जड़ों से जुड़ाव, आस्था और संस्कृति के प्रति विश्वास के लिए इससे बड़े क्या शब्द होंगे, जब उन्होंने पीएम को बताया- जब भी मेरे को दर्द होता है, मुझे एक ही चीज आती है, मैं सिर्फ हनुमान चालीसा बोलता हूं। उस समय भी मैं सिर्फ हनुमान चालीसा ही बोल रहा था और मुझे पता है कि भगवान ने ही मेरे को बचाया।

फ्लाईदुबई फ्लाइट को क्रैश होने से बचाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाने वाले भारतीय कैप्टन स्मित मच्छर से शुक्रवार को जब प्रधानमंत्री मोदी ने वार्ता की तो दोनों ओर से गर्व, सम्मान और प्रेम की परस्पर अभिव्यक्ति थी।

कैप्टन से स्वास्थ्य का हालचाल लेने के साथ ही पीएम बोले- देखिए, पूरा देश आपके लिए प्रार्थना कर रहा है, महामृत्युंजय के जाप सब जगह चल रहे हैं। आपकी हिम्मत ने, आपके धैर्य ने और आपकी सूझबूझ ने, एक क्षण में इतने निर्णय कर लिए आपने... और इतने लोगों की जान बचाई। आज पूरा देश गर्व से कह सकता है कि हम हिंदुस्तानी जान लेने वाले लोग नहीं है, जान बचाने वाले लोग हैं।

140 करोड़ देशवासियों का मान बढ़ाने के लिए कैप्टन के प्रति हृदय से गर्व की अनुभूति व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने उनके परिवार से बातचीत के अनुभव साझा किए। फिर पीएम ने कहा- स्मित अब मैं आपसे सुनना चाहूंगा।

इसके बाद घटना के समय के दृश्य को अपने शब्दों में उकेरा तो वह इस विपदा में जिजीविषा, आस्था और विश्वास के विजय की नई परिभाषा गढ़ते चले गए। कैप्टन स्मित ने बताया- मैं अपनी जिंदगी के लिए लड़ रहा था, लेकिन एक ऐसा पल था जब मुझे अहसास हुआ कि अगर मैंने कुछ नहीं किया...! कुछ पल रुककर फिर बोले- क्योंकि मैं गिर चुका था, मेरे को इतने घाव लग चुके थे कि मैं फंस चुका था नीचे। उस समय मैं बोला अगर मैं नहीं उठूंगा...!

दरअसल, स्मित के दो वाक्यों में आए इस अगर में वह भाव छिपे हैं, जिनसे उन्हें संघर्ष की हिम्मत मिली। उन्होंने बताया- सर मैं 17 साल से जहाज उड़ा रहा हूं। मैं पिछले 11 साल से कैप्टन हूं। मुझे पता चलता है, आंख बंद करके भी कि जहाज में क्या हो रहा है। जब मैं नीचे गिरा हुआ था, तब मुझे अहसास हो रहा था कि एयरक्राफ्ट नीचे जा रहा है। और मुझे ये बिल्कुल पता था कि ये एक अंतिम प्रयास अगर स्मित कर दे, दरवाजा बस वही है और तभी भी मैं मार खा ही रहा था। बस वो खोल दिया। बाकी सब आ गए।

प्रधानमंत्री से बोले कैप्टन स्मित, आप मेरे सबसे बड़े आदर्शइस वार्ता में अपनत्व का भाव भी था। सबसे पहले तो स्मित ने प्रधानमंत्री से कहा- आप मेरे सबसे बड़े आइडियल हैं सर। आप मेरे को ऐसे काल करके मेरी हौसलाअफजाई कर रहे हैं। मुझे बहुत-बहुत-बहुत गर्व महसूस हो रहा है। मुझे खुद पर अब तक गर्व नहीं हो रहा था, लेकिन आपका एक काल आ गया तो मुझे अब खुद पर गर्व हो रहा है।

पीएम ने भी उनसे कहा कि आपको जब भी जरूरत लगे, मैं एक फोन काल दूर हूं। आपने सभी भारतीय पायलट को बचा लिया! प्रधानमंत्री ने इस घटना के संदर्भ में अपनी चिंता भी व्यक्त की। कैप्टन से बोले कि कल मैं देख रहा था कि लोगों ने सोशल मीडिया पर जो अपनी भावनाएं व्यक्त की हैं और लोगों ने कहा- अगर ऐसा न होता, तो पता नहीं हिंदुस्तान पर क्या-क्या बीतती, भारत के सभी पायलटों पर क्या बीतती।

भारत के सभी पायलटों को किस प्रकार से देखा जाता। आपने इन सबको बचा लिया है, यानी बहुत बड़ा काम आपने किया है। और फिर प्रधानमंत्री ने अपनी बात यह कहकर समाप्त कर दी कि जब मिलूंगा, तब अंदर की बातें तो बाद में सुनूंगा, क्योंकि मैं नहीं चाहता हूं कि मोबाइल पर ऐसी बातें करूं।