कैंसर का इलाज पड़ रहा भारी, पांच साल में 75 प्रतिशत तक बढ़ा खर्च; रिपोर्ट में खुलासा
द लैंसेट आन्कोलाजी की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में कैंसर की आनुवंशिक जांच और इलाज तक पहुंच में भारी असमानता है, खासकर कम और मध्यम आय वाले देशों में।

लैंसेट रिपोर्ट ने कैंसर जांच में वैश्विक असमानता बताई

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दुनिया भर में कैंसर की आनुवंशिक (जेनेटिक) जांच और उसके अनुसार होने वाले इलाज तक पहुंच में भारी असमानता है। यह जानकारी 'द लैंसेट' ऑकोलॉजी की नई रिपोर्ट में सामने आई है। इसने कैंसर की आनुवंशिक जांच को लेकर शोध में भी काफी असमानताओं की पहचान की है।
रिपोर्ट के मुताबिक, बायोमार्कर-आधारित कैंसर ट्रायल में से सिर्फ दो प्रतिशत ही कम और मध्यम आय वाले देशों में किए जाते हैं, जबकि अमीर देशों में यह आंकड़ा लगभग 81 प्रतिशत है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कैंसर की दवाओं पर होने वाला वैश्विक खर्च पिछले पांच वर्षों में लगभग 75 प्रतिशत बढ़ा है और 2024 में यह लगभग 252 बिलियन अमेरिकी डालर तक पहुंच गया है। साथ ही, 2029 तक इसके 441 बिलियन अमेरिकी डालर तक पहुंचने का अनुमान है।
शोधकर्ताओं ने क्लिनिकल ट्रायल और जीनोमिक डाटासेट से जुड़े वैश्विक आंकड़ों का विश्लेषण किया और राष्ट्रीय कैंसर कार्यक्रम का सर्वे किया।
टीम का अनुमान है कि दुनिया भर में कैंसर से पीड़ित 70 से 80 लाख लोगों को हर साल स्टैंडर्ड-आफ-केयर मालिक्यूलर टेस्टिंग की जरूरत होती है। हालांकि, इसकी पहुंच अब भी हर जगह नहीं है, खासकर कम और मध्यम आय वाले देशों में।
उदाहरण के लिए, ओवेरियन कैंसर से पीड़ित लगभग 3.14 लाख महिलाएं हर साल ब्रेस्ट कैंसर जीन टेस्टिंग के लिए योग्य होती हैं, फिर भी लगभग आधी महिलाओं को यह टेस्ट नहीं मिल पाता है। इस अंतर की मुख्य वजह कम और मध्यम आय वाले देश में जांच की कम पहुंच है।
(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
