कैंसर की दवाएं हुईं सस्ती, सरकार के फैसले को डॉक्टरों का समर्थन; बताया- मरीजों के लिए मरहम
आम बजट में कैंसर के इलाज में काम आने वाली 17 दवाओं से कस्टम ड्यूटी हटाने के फैसले का प्रमुख ...और पढ़ें
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कैंसर की दवाएं हुईं सस्ती सरकार के फैसले को डॉक्टरों का समर्थन (फाइल फोटो)
HighLights
17 कैंसर दवाओं से कस्टम ड्यूटी हटी, इलाज होगा सस्ता।
डॉ. अशोक वैद ने इसे मरीजों के लिए अप्रत्याशित राहत बताया।
विशेषज्ञों ने सार्वजनिक स्वास्थ्य और बुजुर्गों की देखभाल की सराहना की।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पद्मश्री से सम्मानित और अग्रणी आंकोलॉजिस्ट डॉक्टर अशोक कुमार वैद ने रविवार को पेश किए गए आम बजट में कैंसर के इलाज में काम आनेवाली 17 दवाओं से कस्टम ड्यूटी खत्म किए जाने के कदम का स्वागत किया है।
उन्होंने कहा कि ये एक अप्रत्याशित कदम है, जो मरीजों और उनके स्वजनों को महंगे इलाज से बचाएंगी। उन्होंने कहा कि ये एक बड़ा नीतिगत कदम है। डाक्टर वैद ने कहा कि कैंसर के इलाज को दो या तीन खंडों में बांटा जा सकता है और सबसे बड़ा खंड दवाओं की कीमत होता है।
कैसे होता है कैंसर का इलाज?
कैंसर का इलाज केवल एक बार की थेरेपी नहीं, बल्कि एक लंबी प्रक्रिया होती है। उन्होंने कहा कि जिस तरह डायबिटीज और ब्लड प्रेशर का मरीज लंबे समय तक दवाएं लेता है, उसी तरह अब कैंसर के मरीजों को भी लंबे समय तक दवा लेनी पड़ती है।
नई दवाएं एडवांस स्टेज में भी कैंसर को नियंत्रित कर रही हैं और उसे लंबे समय तक काबू में रख पा रही हैं। इसलिए इलाज का खर्च मरीज और उसके परिवार के लिए बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा बन जाता है। उन्होंने कहा कि ये देखना होगा कि 17 दवाओं में किन्हें शामिल किया गया है, लेकिन निश्चित तौर पर ये बेहद महंगी आयातित दवाएं होंगी।
अपोलो हास्पिटल्स के संस्थापक और चेयरमैन डा. प्रताप सी. रेड्डी ने कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षमता के विस्तार, रोकथाम पर जोर और टियर-2 व टियर-3 शहरों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बेहतर बनाने पर निरंतर ध्यान “विकसित भारत'' के विजन के अनुरूप है।
सीताराम भरतिया इंस्टीट्यूट आफ साइंस एंड रिसर्च के डिप्टी मेडिकल डायरेक्टर डा. जितेंद्र नागपाल ने बजट में बुजुर्गों की स्वास्थ्य देखभाल को प्राथमिकता दिए जाने की सरकार की पहल का स्वागत किया।
विशेषज्ञों ने क्या कहा?
आकाश हेल्थकेयर के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. आशीष चौधरी ने कहा कि एक लाख सहयोगी स्वास्थ्य पेशेवरों (एएचपी) और 1.5 लाख केयरगिवर्स को प्रशिक्षण देने की पहल से सहयोगी स्वास्थ्य सेवाओं और जेरियाट्रिक केयर में मौजूद महत्वपूर्ण कमियों को दूर करने में मदद मिलेगी।
एशियन हास्पिटल के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर डा. एनके पांडे ने कहा कि निजी क्षेत्र की साझेदारी में क्षेत्रीय मेडिकल हब स्थापित करना भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए दूरदर्शी और सकारात्मक कदम है।
