नई दिल्ली [जागरण स्पेशल]। कैंसर एक खतरनाक और जानलेवा बीमारी है। सेल्‍स की अनियंत्रित वृद्धि के कारण कैंसर होता है। मुंह का कैंसर, पेट का कैंसर, सर्वाइकल कैंसर, ब्रेस्‍ट कैंसर आदि कैंसर के प्रमुख प्रकार हैं। कैंसर का पता अगर शुरूआती स्‍टेज में चल जाए तो इसका इलाज संभव है। भारत में पिछले दो दशकों में कैंसर के मामलों में लगभग दो तिहाई से अधिक की वृद्धि हुई हैं। कैंसर से होने वाली मृत्यु-दर भारत में अनेक कारणों से पाश्चात्य देशों की अपेक्षा अधिक है। 

कैंसर के मरीजों में लगातार हो रही बढ़त कुछ हद तक हमारे खाने-पीने की चीजों पर भी निर्भर करती है। हमें कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचने के लिए नियमित आहार में क्‍या खाना चाहिए और क्‍या नहीं इस पर ध्‍यान देना बहुत जरूरी है, क्‍योंकि बहुत से आहार के सेवन से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। आइए ऐसे ही कुछ आहार के बारे में जानते हैं जिनके सेवन से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

रेड मीट
रेड मीट में वैसे तो लिनोलिक एसिड का गुण होता है। लेकिन इसे हर रोज खाना बहुत खतरनाक होता है और इसके लगातार सेवन से कैंसर का जोखिम बढ जाता है। यह स्तन, बड़ी आंत एवं प्रॉस्टेट कैंसर के खतरे को बढ़ाने में भी सहायता करता है। यह सलाह दी जाती है कि सप्ताह में 300 ग्राम से अधिक रेड मीट का सेवन नहीं करना चाहिए। प्रॉसेस्ड मीट में प्रिजर्वेटिव्स और नमक का इस्तेमाल ज्यादा किया जाता है। इसके अलावा इसमें हानिकारक फैट की मात्रा भी बहुत ज्यादा होती है। इसलिए इसका ज्यादा सेवन नहीं करना चाहिए।

आर्टिफिशियल स्वीटनर
चीनी के ज्‍यादा सेवन करना नुकसानदेह होता है, और इसके ज्‍यादा सेवन से डायबिटीज का खतरा भी बढ़ जाता है, और वजन में भी लगातार बढ़ोतरी होने लगती है। यह बात तो हम सभी जानते है। लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि चीनी की जगह इस्‍तेमाल किये जाने वाले आर्टिफिशियल स्वीटनर एक तरह का केमिकल है। आर्टिफिशियल स्वीटनर का स्वाद चीनी की तरह ही होता है, लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं कि यह किसी मीठे जहर से कम नहीं है। आर्टिफिशियल स्वीटनर से सिरदर्द, याददाश्त की कमी, अचानक चक्कर आकर गिर पड़ना और कैंसर जैसी बीमारियों के शिकार हो सकते हैं। इसके सेवन से मस्तिष्क ट्यूमर की संभावना बनी रहती है।

आलू चिप्स 
आलू के चिप्स या फेंच फ्राई जैसी चीजों के शौकीन लोगों को सावधान हो जाना चाहिए क्‍योंकि ये केवल मोटापे और दिल के रोगों को बढ़ाने के साथ कैंसर का कारण भी है। एक सर्वेक्षण के अनुसार, स्टार्च वाले कुछ खाद्य पदार्थों में ऐक्रिलामाइड नामक एक केमिकल पाया जाता है। ऐक्रिलामाइड एक ऐसा तत्व है, जो 120 डिग्री सेंटीग्रेड से अधिक तापमान पर पकाए, तले अथवा ग्रिल किए जाने वाले खाद्य पदार्थों में उपस्थित होता है और कैंसर से संबधित होता है।

माइक्रोवेव पॉपकॉर्न से बचें
हर कोई पॉपकार्न खाने के लिए उतावला रहता है। चाहे मूवी हॉल हो या घर में दोस्‍तों के साथ मैच देखने का प्रोग्राम, इस समय पॉपकॉर्न को सभी खाना पसंद करते हैं। यह एक टाइम पास, सस्ता और स्वादिष्ट आहार है। और इसे माइक्रोवेव में बनाना बहुत आसान और सुविधाजनक होता है। लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि इसको बनाते समय इसमें एक (PFOA) केमिकल डाला जाता है जो बहुत खतरनाक होता है। इसके खाने से लोगों का किडनी, मूत्राशय, लीवर और आंत कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

रिफाइंड शुगर का असर
कैंसर कोशिकाओं को रिफाइंड शुगर पसंद होता है, जो इंसुलिन के स्‍तर को बढ़ाकर, कैंसर के विकास को बढ़ावा देती है। इसके लिए हाई फ्रूक्‍टोज कॉर्न सिरप सबसे बड़ा अपराधी माना जाता है और यह किसी भी मिठाई में पाया जा सकता है। इसके सेवन करने से कैंसर की संभावनाएं बनी रहती है। यह कैंसर कोशिकाओं में आसानी से जगह बना लेता है।

प्रोसेस्‍ड सफेद आटा भी है नुकसानदेह
सफेद आटा आपकी सेहत के लिए अच्‍छा नहीं होता, क्‍योंकि वह प्रोसेस्‍ड होने के कारण सफेद होता है और इसमें सैचुरेटेड फैट की बहुत अधिक मात्रा में होती है। सैचुरेटेड फैट का संबंध कैंसर से होता है। इसमें अधिक केमिकल और क्लोरीन गैस होती है। इसका शरीर पर बुरा असर पड़ता है। अगर किसी को कैंसर के शुरुआती लक्षण दिखें तो इसे खाने से बचना चाहिए।

अल्कोहल भी है घातक
अल्कोहल के अधिक सेवन से डायबिटीज, मोटापा और कैंसर जैसी घातक बीमारियों का खतरा बना रहता है। जो लोग शराब पीते हैं उनमें कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। आजकल महिलाएं भी इसका आनंद लेने में पीछे नहीं रह गयी है। लेकिन एक ताजा स्टडी के अनुसार अल्कोहल पीने वाली महिलाओं में स्तन कैंसर की दर में 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

डिब्बा बंद टमाटर और टमाटर से बनी चीजें
हालांकि टमाटर और टमाटर से बने उत्‍पाद में लाइकोपिन नामक तत्‍व पाए जाने के कारण यह प्रोस्टेट के स्वास्थ के लिए फायदेमंद होता है। लेकिन डिब्‍बा बंद टमाटर और टमाटर से बने उत्‍पाद से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। टिन के डब्बे की परत में एक सेंथेटिक एस्ट्रोजन बिस्फेनॉल-ए (बीपीए) पाया जाता है। चूंकि टमाटर एसिडिक होता है, इसलिए बिस्फेनॉल-ए इसमें घुल सकता है। इसलिए आपको डिब्बा बंद टमाटर के उत्पाद से बचना चाहिए।  

Posted By: Sanjay Pokhriyal