नई दिल्‍ली, आइएएनएस। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के उपाध्‍यक्ष और आम आदमी पार्टी के 'चुनावी सलाहकार' की भूमिका निभा रहे चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने अब कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। प्रशांत किशोर का कहना है कि कांग्रेस नागरिकता संशोधन कानून और नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन्स के मुद्दे पर काफी हल्‍के-फुल्‍के अंदाज में विरोध प्रदर्शन करती नजर आ रही है। कांग्रेस को इस समय खुलकर सामने आना चाहिए। उन्‍होंने सोनिया गांधी से एनआरसी के मुद्दे पर खुल कर सामने आने की सलाह दी है।

प्रशांत किशोर ने कहा कि सोनिया गांधी के सिर्फ एक वीडियो संदेश जारी करने से बात नहीं बनेगी। कांग्रेस के बड़े नेताओं को भी सड़क और गलियों में उतरना पड़ेगा। प्रशांत किशोर ने कांग्रेस के मुख्यमंत्रियों पर भी सवाल उठाए। उन्‍होंने कहा कि कांग्रेस के मुख्‍यमंत्रियों का सिर्फ यह कह देना कि एनआरसी को वह अपने राज्‍यों में लागू नहीं करेंगे, काफी नहीं है। ऐसे में सभी को एक साथ मिलकर विरोध प्रदर्शन करना चाहिए, ताकि ज्‍यादा से ज्‍यादा दबाव बनाया जा सके।

प्रशांत किशोर ने कांग्रेस नेताओं को बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार के फॉर्मूले पर चलने की सलाह दी। नीतीश कुमार ने कहा है कि वे एनआरसी को किसी भी सूरत में लागू नहीं होने देंगे। प्रशांत किशोर का आरोप है कि कांग्रेस बस दिखावा कर रही है। सोनिया ने कहा था कि कांग्रेस के कार्यकर्ता देशभर में सीएए एनआसी का विरोध कर रहे हैं। प्रशांत किशोर कहते हैं कि कांग्रेस के नेता ग़ायब हैं। वे सिर्फ़ फ़ोटो खिंचाने के लिए ही कुछ जगहों पर नज़र आते हैं।

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बता दें कि प्रशांत किशोर का पता नहीं चलता है कि वह कह क्‍या स्‍टैंड ले लेंगे। जेडीयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष होते हुए भी प्रशांत किशोर यानि पीके अपनी पार्टी के खिलाफ चले गए। मामला नागरिकता संशोधन बिल का था। वे चाहते थे कि जेडीयू संसद में इसके खिलाफ वोट करे, लेकिन नीतीश कुमार ने इस मुद्दे पर अपने सहयोगी भारतीय जनता पार्टी का साथ देने का फैसला किया।

इससे पहले संसद में नागरिकता संशोधन बिल का समर्थन करने वाली बीजेडी ने अब पाला बदल लिया है। ओडिशा के मुख्‍यमंत्री नवीन पटनायक ने NRC के विरोध की घोषणा की है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र बघेल भी इसके खिलाफ हैं, उन्‍होंने कहा कि अगर एनआसी लागू होता है, तो इस पर साइन न करने वाले वह पहले शख्‍स होंगे। हालांकि, प्रशांत किशोर को लगता है जिस तरह से कांग्रेस को इस मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरना चाहिए था, वैसा नहीं हो पाया है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का भी इसमुद्दे पर गोल-मोल रवैया रहा है। बंगाल में ममता बनर्जी लगातार रैलियां कर सीएए और एनआरसी का विरोध कर रही हैं। प्रशांत किशोर चाहते हैं इसी मुद्दे के बहाने कम से कम विपक्ष एकजुट हो।

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