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बिक्स के 'नई दिल्ली घोषणापत्र' में क्या है खास? कैसे पेरिस समझौते और AI पर बनी ऐतिहासिक सहमति

Published: Sun, 13 Sep 2026 06:00 AM (IST)

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के पहले सत्र में जलवायु परिवर्तन, महिला सशक्तीकरण, शिक्षा और कृषि जैसे अहम मुद्दों पर सदस्य देशों ...और पढ़ें

जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते के लक्ष्यों के साथ खड़े ब्रिक्स देश (फोटो-PTI)

जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते के लक्ष्यों के साथ खड़े ब्रिक्स देश (फोटो-PTI)

HighLights

  1. जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प।

  2. महिला सशक्तीकरण, शिक्षा और अंतरिक्ष सहयोग पर सदस्य देशों की सहमति।

  3. किसानों के लिए चार नई पहलें; एआई, बौद्धिक संपदा पर भी ध्यान।

जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के पहले सत्र में जलवायु परिवर्तन से लेकर महिला सशक्तीकरण, शिक्षा, कृषि और अंतरिक्ष सहयोग तक कई अहम मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच सहमति बनी।

नई दिल्ली घोषणापत्र में पेरिस समझौते के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ), बौद्धिक संपदा, दुर्लभ खनिज और विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में सुधार जैसे विषयों को भी जगह दी गई है।

पेरिस समझौते के लक्ष्यों के साथ रहने का संकल्प

ब्रिक्स देशों के नेताओं ने शनिवार को जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (यूएनएफसीसीसी) और उसके पेरिस समझौते के उद्देश्यों, सिद्धांतों और लक्ष्यों को पूरा करने की दिशा में मिलकर काम करने का संकल्प लिया।

नेताओं ने सभी देशों से पेरिस समझौते समेत जलवायु संबंधी अंतरराष्ट्रीय समझौतों के तहत अपनी मौजूदा प्रतिबद्धताओं को बनाए रखने और जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयासों को जारी रखने तथा उन्हें और मजबूत करने का आह्वान किया।

यूएन तक बढ़े महिलाओं की भागीदारी

घोषणापत्र में महिलाओं को नेतृत्व, निर्णय लेने और आर्थिक विकास व सामाजिक बदलाव में अहम भागीदार बताया गया है।

नेताओं ने ‘महिला, शांति और सुरक्षा’ के वैश्विक एजेंडे के तहत शांति निर्माण में महिलाओं की भूमिका को भी स्वीकार किया। ब्रिक्स देशों में महिलाओं की उद्यमिता, नेतृत्व और आर्थिक भागीदारी बढ़ाने में ब्रिक्स महिला व्यापार गठबंधन (डब्ल्यूबीए) के योगदान की सराहना की गई।

नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र प्रमुख के तौर पर किसी महिला को नियुक्त करने का भी समर्थन किया। साथ ही इस वैश्विक संस्था में व्यापक सुधार की वकालत की। अंतरिक्ष सहयोग को शांतिपूर्ण उद्देश्यों तक रखने पर जोर नेताओं ने अंतरिक्ष की शांतिपूर्ण खोज और इस्तेमाल में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व को स्वीकार किया।

घोषणापत्र में कहा गया कि अंतरिक्ष प्रणालियों, अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीक की उपलब्धियों का इस्तेमाल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

शिक्षा में एआई के इस्तेमाल को बढ़ावा

ब्रिक्स देशों ने शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर तौर-तरीकों और अनुभवों को साझा करने पर सहमति जताई। साथ ही, एआई जैसी नई तकनीकों का इस्तेमाल मानव हित में करने पर जोर दिया गया।

नेताओं ने ‘ब्रिक्स यूनिवर्सिटी ग्लोबल रैंकिंग एंड इवैल्यूएशन सिस्टम’ विकसित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की। ब्रिक्स नेटवर्क यूनिवर्सिटी समेत मौजूदा शिक्षा तंत्र के माध्यम से सहयोग जारी रखने का समर्थन किया गया।

घोषणापत्र में पारंपरिक और स्थानीय ज्ञान प्रणालियों पर अकादमिक सहयोग मजबूत करने के लिए ब्रिक्स दिशा-निर्देशों को आगे बढ़ाने की भारत की पहल की सराहना की गई।

ब्रिक्स नेटवर्क यूनिवर्सिटी से पारंपरिक, स्थानीय और क्षेत्रीय ज्ञान प्रणालियों को एक अतिरिक्त ‘इंटरनेशनल थीमैटिक ग्रुप’ (आइटीजी) के रूप में शामिल करने पर विचार करने का आग्रह भी किया गया।

बौद्धिक संपदा पर सहयोग बढ़ेगा ब्रिक्स देशों के बौद्धिक संपदा (आईपी) कार्यालयों के बीच जागरूकता बढ़ाने, क्षमता निर्माण और आइपी के व्यावसायीकरण के साथ पेटेंट जांच, पारंपरिक ज्ञान, मूल स्थान के नाम, भौगोलिक संकेतक (जीआई) और एआई के इस्तेमाल जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।

किसानों के लिए चार नई पहल

शिखर सम्मेलन में कृषि और किसानों से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। नेताओं ने पूरे ब्रिक्स समूह के लिए अनाज व्यापार मंच और किसानों पर केंद्रित चार नई पहलों को मंजूरी दी। इनमें बीज, कृषि संबंधी जरूरी सामान, कृषि-पारिस्थितिकी और डिजिटल खेती शामिल हैं।

भारत ने ब्रिक्स देशों से कहा कि 2026 में उसकी अध्यक्षता के दौरान खाद्य सुरक्षा को लेकर केवल चर्चा तक सीमित रहने के बजाय ठोस कदम उठाए जाएं।

इंदौर कृषि घोषणापत्र की पहल

अब शीर्ष स्तर पर नई दिल्ली नेताओं का घोषणापत्र जून 2026 में इंदौर में जारी कृषि मंत्रियों के घोषणापत्र पर आधारित है।

इसमें चार पहलों— एजीआरआईएन, बीज प्रणालियों में किसानों के अधिकारों पर वैश्विक मंच, कृषि-पारिस्थितिकी पर उत्कृष्टता केंद्रों का नेटवर्क और डिजिटल खेती का नेटवर्क—को मंत्रियों के स्तर से आगे बढ़ाकर राष्ट्राध्यक्षों के स्तर पर रखा गया है।