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भारत की अध्यक्षता में BRICS देशों का बड़ा कदम, AI के लिए मिलकर बनाएंगे साझा नियम

Published: Thu, 16 Jul 2026 08:56 PM (IST)

भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स देशों ने AI के लिए साझा नियम बनाने पर सहमति जताई है। यह पहल AI ...और पढ़ें

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HighLights

  1. भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स देशों की बेंगलुरु में बैठक।

  2. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए साझा नियम बनाने पर सहमति।

  3. आम लोगों की निजी जानकारी की सुरक्षा होगी सुनिश्चित।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। मोबाइल, बैंकिंग, अस्पताल, पढ़ाई और सरकारी सेवाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के इस्तेमाल बढ़ने के साथ ही उसके गलत इस्तेमाल का खतरा भी बढ़ रहा है। इससे बचाव के लिए अब दुनिया एआई के साझा नियम बनाने की कोशिश कर रही है।

भारत, चीन, रूस एवं ब्राजील समेत ब्रिक्स के सभी देश मिलकर तय करने का प्रयास कर रहे हैं कि एआई और दूसरी नई तकनीकों के लिए ऐसे कौन से कॉमन नियम बनाए जाएं, जिनका सभी अनुशासित तरीके से पालन कर सकें।

इसी प्रयास के तहत बेंगलुरु में गुरुवार को भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स देशों की बैठक हुई, जिसमें सबने मानकीकरण (स्टैंडर्ड) के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनाई।

यदि यह प्रयास सफल होता है और एआई के लिए साझा नियम बनते हैं तो सबसे ज्यादा फायदा आम लोगों को होगा, क्योंकि लोगों की निजी जानकारी की सुरक्षा होगी। साथ ही एआई से मिलने वाली जानकारी की विश्वसनीयता और नई तकनीकों की गुणवत्ता पर अधिक ध्यान दिया जा सकेगा।

इससे अलग-अलग देशों में अलग-अलग नियम होने से पैदा होने वाली दिक्कतें भी कम होंगी और नई तकनीकों का इस्तेमाल अधिक सुरक्षित बन सकेगा।केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि मानकीकरण पर ब्रिक्स देशों का सहयोग 2022 में शुरू हुआ था और अब जाकर यह समझौता अंतिम रूप तक पहुंचा है। यह ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग का औपचारिक ढांचा तैयार करेगा।

इससे एक-दूसरे के अनुभव साझा करने, तकनीकी मदद बढ़ाने, विशेषज्ञता का आदान-प्रदान करने और क्षमता निर्माण में मदद मिलेगी। भारत चाहता है कि दुनिया के नियम केवल कुछ विकसित देश तय न करें, बल्कि विकासशील देशों की जरूरतों और परिस्थितियों को भी बराबर महत्व मिले।

उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने कहा कि ब्रिक्स देश अगर समान मानकों पर काम करेंगे तो उनके बीच व्यापार और निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा। आने वाले वर्षों में एआई बिजली या इंटरनेट की तरह हर क्षेत्र का हिस्सा बनने वाला है।

इसलिए अभी से उसके लिए साझा और भरोसेमंद नियम बनाना जरूरी है। बेंगलुरु में शुरू हुई यह पहल भविष्य में यह तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है कि एआई लोगों के लिए कितना सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद रहेगा।