'भारत घर जैसा लगता है, यहां मिला अपनापन', वैश्विक पत्रकारों ने आतिथ्य सत्कार को सराहा
नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को कवर करने आए विदेशी पत्रकारों ने भारत की मेहमाननवाजी और संस्कृति की जमकर तारीफ की है।
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वैश्विक पत्रकारों ने भारत के आतिथ्य सत्कार को सराहा।
HighLights
विदेशी पत्रकारों ने भारत की आत्मीयता और संस्कृति की प्रशंसा की।
ब्रिक्स अफ्रीका के पत्रकारों ने भारतीय व्यंजनों को सराहा।
मलेशियाई पत्रकार भारत के आर्थिक विकास से प्रभावित हुईं।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को कवर करने पहुंचे विदेशी पत्रकारों ने भारत की मेहमाननवाजी और संस्कृति की भूरी-भूरी प्रशंसा की है। दुनिया के अलग-अलग कोनों से आए इन मीडियाकर्मियों का कहना है कि एक अरब से अधिक की आबादी वाले इस देश में होने के बावजूद उन्हें कभी यह अहसास नहीं हुआ कि वे अपने घर से दूर हैं।
भारत की आत्मीयता ने उन्हें ऐसा अपनापन दिया कि हर कोई यहां की संस्कृति, खान-पान और विकास की गति का मुरीद हो गया। 'करोड़ों की भीड़ में भी नहीं हुआ खोने का अहसास' टीवी ब्रिक्स अफ्रीका की मेलिसा हालो ने अपने पहले भारत दौरे को बेहद खूबसूरत अनुभव बताया।
उन्होंने कहा कि शिखर सम्मेलन से पहले मंदिरों के दर्शन और स्थानीय सैर के दौरान उन्हें अद्भुत शांति का अनुभव हुआ। करोड़ों लोगों की आबादी के बीच भी उन्हें जरा भी अजनबीपन महसूस नहीं हुआ क्योंकि यहां के लोग बेहद मददगार हैं। वहीं, इसी मीडिया संस्थान के शाद्रक हालो ने भारतीय व्यंजनों की तारीफ करते हुए कहा कि तंदूरी चिकन समेत हर एक बाइट उनके लिए स्वादिष्ट और रंगीन अनुभव रही।
खलीज टाइम्स की वरिष्ठ पत्रकार अलिया मोहम्मद ओबैद अली अल धन्हानी ने भी ब्रिक्स सम्मेलन के शानदार और सुव्यवस्थित आयोजन के साथ-साथ भारतीय आतिथ्य की खुलकर सराहना की।
'तेजी से विकास करती अर्थव्यवस्था और साझा सांस्कृतिक धागे'
दक्षिण अफ्रीका के अन्य पत्रकारों ने भी भारत में आरामदायक प्रवास और हर कदम पर मिलने वाले स्वागत की प्रशंसा की। पहली बार भारत आई मलेशियाई पत्रकार यास्मीन नताशा देश की आर्थिक तरक्की और तेजी से फैलते परिवहन तंत्र को देखकर हैरान रह गईं।
इसके अलावा, इंडोनेशियाई पत्रकार मेगा मेई वाहिदावती ने दोनों देशों के बीच प्राचीन और गहरे सांस्कृतिक रिश्तों को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि भारत और इंडोनेशिया का इतिहास और संस्कृत भाषा का प्रभाव आपस में गहराई से जुड़ा है, फिर चाहे बात मुद्राओं के नाम 'रुपए और रुपिया' की हो या दोनों देशों के नामों की समानता की।
इन सभी विदेशी पत्रकारों के अनुभव यह साबित करते हैं कि भारत की आत्मीयता ने वैश्विक मंच के मेहमानों के दिलों पर एक गहरी और अमिट छाप छोड़ी है।
(समाचार एजेंसी आईएएनएस के इनपुट के साथ)
