'वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत ने दिया भरोसेमंद व्यापार का संदेश', BRICS बिजनेस फोरम में बोले जयशंकर
विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने नई दिल्ली में ब्रिक्स बिजनेस फोरम को संबोधित किया, जहां उन्होंने वैश्विक उथल-पुथल के ...और पढ़ें
HighLights
जयशंकर ने ब्रिक्स बिजनेस फोरम में भारत की भूमिका पर जोर दिया।
वैश्विक उथल-पुथल में भरोसेमंद व्यापार और आत्मनिर्भरता पर बल दिया।
भारत की बढ़ती विनिर्माण क्षमता और डिजिटल अनुभव को उजागर किया।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को लेकर तैयारियां लगभग-लगभग पूरी हो गई है। ऐसे में शुक्रवार को विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने ब्रिक्स बिजनेस फोरम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने वैश्विक बाजार में भारत की बढ़ती भूमिका पर जोर दिया।
अपने संबोधन में जयशंकर ने कहा कि आज पूरी दुनिया का राजनीतिक और आर्थिक ढांचा भारी बदलाव (चंर्न) के दौर से गुजर रहा है। दुनिया के सामने अस्थिरता, अनिश्चितता और जटिलता सबसे बड़ी चुनौतियां बन चुकी हैं। हम सब भू-राजनीतिक संघर्षों, महामारियों और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी आपदाओं के आर्थिक दुष्परिणामों को साफ देख रहे हैं।
बढ़ रहे जोखिम और अवसर- जयशंकर
विदेश मंत्री ने कहा कि एक तरफ जहां दुनिया संकटों से जूझ रही है, वहीं दूसरी तरफ तेजी से हो रहे डिजिटलीकरण और तकनीकी विकास ने तरक्की, उत्पादकता और विकास के नए रास्ते खोल दिए हैं।
जयशंकर ने आगे इस बात पर जोर दिया कि आज वैश्विक आर्थिक स्थिति ऐसी हो गई है कि जोखिम और अवसर दोनों फैल रहे हैं, ऐसे में समय रहते हालात भांपने, खुद को ढालने और तुरंत प्रतिक्रिया देने की क्षमता सबसे ज्यादा जरूरी हो गई है।
कारोबार को आसान बनाना मुख्य उद्देश्य- जयशंकर
जयशंकर ने आगे कहा कि हमारा मुख्य उद्देश्य यह होना चाहिए कि ब्रिक्स देशों के कारोबारियों के लिए नए साझेदार तलाशना, ज्यादा बाजारों तक पहुंच बनाना, सप्लाई नेटवर्क को जोड़ना और व्यावसायिक साझेदारियों को आसान बनाना कैसे संभव हो सके। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों के लिए आर्थिक गतिविधियों और आर्थिक सुरक्षा का सीधा मतलब 'आत्मनिर्भरता' है।
जयशंकर ने कहा कि हमारा लक्ष्य झटकों को झेलने की अपनी क्षमता को मजबूत करना है, ताकि हम वैश्विक स्तर पर जुड़े और प्रतिस्पर्धीबने रहें। इसके लिए कुछ जरूरी बातें होना बहुत आवश्यक हैं।
- निष्पक्ष व्यापारिक तौर-तरीके
- भरोसेमंद लॉजिस्टिक्स और परिवहन व्यवस्था
- एक अनुमानित और स्थिर व्यापारिक माहौल
- कारोबार में विविधता और पारदर्शी व्यापार व निवेश
- ऐसी ऊर्जा प्रणालियां जो किसी भी बाधा से निपटने में सक्षम हों और हर देश की अपनी जरूरतों के अनुकूल हों।
भारत ने पेश की अपनी ताकत- जयशंकर
इस दौरान जयशंकर भारत की बढ़ती ताकत और उसकी क्षमताओं को दुनिया के सामने रखा है। उन्होंने कहा कि आज भारत एक बहुत बड़ा और लगातार बढ़ता हुआ बाजार है, जहां विनिर्माण क्षमताएं तेजी से फैल रही हैं। हमारे पास टैलेंट का विशाल भंडार, डिजिटल अनुभव के साथ-साथ एक बेहद शानदार और गतिशील इनोवेशन व आंत्रप्रेन्योरशिप बेस मौजूद है।
विदेश मंत्री ने बिजनेस समुदाय से आह्वान करते हुए कहा कि जैसे-जैसे हमारे देश के शीर्ष नेता ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए मिल रहे हैं, ऐसे में इस फोरम का सबसे बड़ा और उपयोगी योगदान यही होगा कि वह ब्रिक्स के अगले दौर के लिए एक स्पष्ट और व्यावहारिक व्यापारिक नजरिया सामने रखे। भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और कारोबार को आसान बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
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