नई दिल्‍ली (ऑनलाइन डेस्‍क)। एक तरफ जहां कोरोना का खौफ हर किसी के चेहरे पर देखा जा सकता है। वहीं, पिछले दिनों सोशल मीडिया पर आए एक वीडियो ने लोगों को ये सोचने पर मजबूर कर दिया था कि इससे डरना कैसा, हमें हौसला नहीं खोना चाहिए। जी हां! ये वीडियो एक ऐसी युवती का था, जो एक अस्‍पताल की इमरजेंसी में एक बेड पर बैठी थी। उसको ऑक्‍सीजन समेत कई दूसरी चीजें लगी थीं। उसके करीब हिंदी मूवी डियर जिंदगी का गाना बज रहा था ,लव यू जिंदगी और वो उस पर बैठे-बैठे झूम रही थी। करीब एक सप्‍ताह पहले इस वीडियो को उसका इलाज करने वाली एक डॉक्‍टर मोनिका लंगेह ने ट्वीट किया था।

अपने ट्वीट में उन्‍होंने लिखा था कि सभी उसकी जिंदगी के लिए दुआ करें, लेकिन अफसोस उसको मौत के क्रूर हाथों से बचाया नहीं जा सका। कोरोना ने लाखों लोगों के साथ इस खुशमिजाज युवती को भी उसके परिवार से छीन लिया। डॉक्‍टर मोनिका के ट्वीट पर कोरोना काल में राहत बनकर सामने आए सोनू सूद ने भी ट्वीट किया था। इस युवती के निधन के बाद डॉक्‍टर मोनिका ने इसकी जानकारी भी ट्वीट कर दी और लिखा कि हम उसको बचा नहीं सके। उन्‍होंने उन तमाम लोगों से भी अपील की कि वो इस मुश्किल समय में उन्‍हें और इस युवती के परिवार को परेशान करना बंद करें। ऐसा उन्‍होंने इसलिए भी कहा, क्‍योंकि इस युवती के वीडियो वायरल होने के बाद कई लोगों और मीडिया संस्‍थानों ने डॉक्‍टर मोनिका से इंटरव्‍यू देने की मांग की थी।

अपने ट्वीट में डॉक्‍टर मोनिका ने ये भी लिखा है कि कृपा कर सभी इस मुश्किल घड़ी में अपनी जिम्‍मेदारी को समझें। युवती के परिवार वाले किसी से भी कोई मदद नहीं चाहते हैं। बस आप दुआ करें कि उनका परिवार इस मुश्किल घड़ी से बाहर निकल सके। ये युवती भले ही इस दुनिया से अब अलविदा कह गई, लेकिन जाते-जाते भी वो एक मैसेज लोगों को जरूर दे गई है कि बुरे से बुरे दौर में भी कभी हिम्‍मत मत हारो।

इस बहादुर युवती के निधन पर सोनू सूद ने लिखा ये बेहद दुखद है। ऐसा कभी नहीं सोचा था कि वो अपने परिवार के बीच दोबारा नहीं जा सकेगी। जिंदगी बेहद कठोर है। इस कोरोना काल में हमनें ऐसे कई लोगों को खो दिया है जो जीने के काबिल थे। भले ही हम आने वाले दिनों में सामान्‍य हो जाएं लेकिन इस बुरे दौर को कभी नहीं भूल सकेंगे। इससे बाहर आना बेहद मुश्किल होगा।

आपको बता दें कि इस युवती की उम्र महज तीस वर्ष की थी। गंभीर हालत में उसको अस्‍पताल में भर्ती किया गया था, लेकिन बेड न मिलने की वजह से इमरजेंसी में ही जगह देकर उसका इलाज किया गया था। करीब 10 दिनों से उसका अस्‍पताल में इलाज चल रहा था और एनआईवी सपोर्ट पर थी। उसको प्‍लाज्‍म थेरेपी के अलावा रेमडेसिविर भी दिया गया। वो भले ही जिंदगी की जंग हार गई, लेकिन उसकी इच्छाशक्ति बेहद मजबूत थी।

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