ब्रह्मोस हुआ ग्लोबल... 2028 तक अगली पीढ़ी की मिसाइल, 1500 किमी रेंज वाला वेरिएंट बनाने की तैयारी
ब्रह्मोस एयरोस्पेस 2027-28 तक अपनी अगली पीढ़ी की मिसाइल ब्रह्मोस-एनजी का प्रोटोटाइप तैयार करने की दिशा में तेजी से काम ...और पढ़ें

विदेशी सेनाएं एयर-लॉन्च्ड ब्रह्मोस में दिलचस्पी दिखा रही हैं
HighLights
विदेशी सेनाएं एयर-लॉन्च्ड ब्रह्मोस में दिलचस्पी दिखा रही हैं
भारत के रक्षा निर्यात में भी तेज वृद्धि देखी जा रही है
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ब्रह्मोस एयरोस्पेस 2027-28 तक अपनी अगली पीढ़ी की मिसाइल ब्रह्मोस-एनजी का प्रोटोटाइप तैयार करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। कंपनी अपनी सप्लाई चेन मजबूत करने और उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर फोकस कर रही है ताकि बढ़ती घरेलू और विदेशी मांग को पूरा किया जा सके।
ब्रह्मोस एयरोस्पेस के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. जयतीर्थ जोशी ने एएनआई को दिए इंटरव्यू में बताया कि ब्रह्मोस-एनजी मौजूदा मिसाइल का छोटा, हल्का और ज्यादा स्टेल्थ वर्जन होगा। इसमें स्वदेशी सामग्री ज्यादा होगी, नई तकनीक और एडवांस्ड मटेरियल का इस्तेमाल होगा।
यह मिसाइल भारत के डीआरडीओ और रूस की एनपीओ माशिनोस्त्रोयेनिया के संयुक्त उद्यम के जरिए विकसित की जा रही है। शुरुआत में एयर-लॉन्च्ड कॉन्फिगरेशन में प्रोटोटाइप तैयार किया जाएगा, जिससे भारतीय वायुसेना की स्ट्राइक क्षमता और सकती है।
विदेशी सेनाओं में बढ़ी दिलचस्पी
विदेशी सेनाएं एयर-लॉन्च्ड ब्रह्मोस में दिलचस्पी दिखा रही हैं। कुछ देश सुखोई-30 फाइटर जेट ऑपरेट करते हैं, जिस पर भारतीय वायुसेना भी ब्रह्मोस लगाती है। ब्रह्मोस-एनजी के प्रति भी संभावित ग्राहकों में रुचि बढ़ रही है।
मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों ने पहली बार ब्रह्मोस मिसाइल का युद्ध में इस्तेमाल किया था। पाकिस्तानी एयरबेस नूर खान समेत महत्वपूर्ण ठिकानों पर हमला किया गया। मिसाइल ने सटीक निशाना साधा और किसी भी ब्रह्मोस को इंटरसेप्ट नहीं किया जा सका। इस प्रदर्शन ने विदेशी सेनाओं का ध्यान और खींचा है।
1500 किमी रेंज वाला वेरिएंट अभी अवधारणा स्तर पर
कंपनी मिसाइल की रेंज बढ़ाकर 1500 किलोमीटर करने पर भी विचार कर रही है। यह वेरिएंट अभी अवधारणा (कॉन्सेप्टुअल) चरण में है। कंपनी अपने रूसी पार्टनर के साथ आगे के अपग्रेड पर चर्चा कर रही है।
जमीन, समुद्र और हवा से किए गए परीक्षणों में मूल 290 किमी रेंज से ज्यादा क्षमता साबित हो चुकी है, लेकिन 1500 किमी वाले वर्जन के विकास या तैनाती का कोई समयसीमा अभी घोषित नहीं की गई है।
उत्पादन बढ़ाने और निर्यात पर जोर
ब्रह्मोस एयरोस्पेस हैदराबाद, नागपुर, पिलानी और लखनऊ की इकाइयों में मौजूदा ऑर्डर पूरे कर रही है। सप्लाई चेन मजबूत करने के लिए एक-दो सप्लायर की जगह 45 तक सोर्स बढ़ाने की योजना है। निर्यात में भी सफलता मिल रही है।
फिलीपींस के साथ डील के बाद इस साल दो और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों (इंडोनेशिया और वियतनाम) के साथ समझौते हुए हैं। इन ऑर्डरों से निर्यात 600 मिलियन डॉलर से ज्यादा होने की उम्मीद है। भारत के रक्षा निर्यात में भी तेज वृद्धि देखी जा रही है।
