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ब्रह्मपुत्र नदी पर बड़ा खतरा: कभी भी आ सकती है भयंकर बाढ़, चीन के मेगा बांध को लेकर नई चेतावनी

Published: Mon, 26 Oct 2026 06:46 PM (IST)

चीन के शोधकर्ताओं ने ब्रह्मपुत्र नदी में पानी का बहाव बढ़ने और बाढ़ के खतरे की चेतावनी दी है, जिससे चिंताएं बढ़ गई हैं।

चीन के मेगा बांध पर नई चेतावनी

चीन के मेगा बांध पर नई चेतावनी

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। चीन के शोधकर्ताओं की हालिया चेतावनी ने भारत और बांग्लादेश की चिंता बढ़ा दी है। इस सदी के दौरान ब्रह्मपुत्र नदी में पानी का बहाव यानी रनऑफ बढ़ने की आशंका जताई गई है, जिससे बाढ़ का खतरा भी काफी ज्यादा हो सकता है।

इस चेतावनी के बाद तिब्बत में इस नदी पर बनाई जा रही चीन की 168 अरब डॉलर की मेगा बांध परियोजना के संभावित खतरों और प्रभावों को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

पेड़ों के छल्लों से लगाया इतिहास का पता

चीनी विज्ञान अकादमी और युन्नान यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने दक्षिण-पूर्वी तिब्बती पठार से पेड़ों के छल्लों की चौड़ाई का डेटा इकट्ठा किया। इसके जरिए उन्होंने साल 1325 से 2020 तक नदी के पानी के बहाव के इतिहास का पुनर्निर्माण किया।

इस ऐतिहासिक डेटा को आधुनिक जलवायु आंकड़ों के साथ मिलाकर एक नया मॉडल तैयार किया गया है।

पीटीआई के अनुसार, साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने सोमवार को बताया कि यह शोध 8 अक्टूबर को चाइना साइंस बुलेटिन नामक प्रसिद्ध जर्नल में प्रकाशित हुआ था। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह मॉडल भविष्य की जलवायु परिस्थितियों में नदी के बहाव में बढ़ोतरी और बाढ़ जैसी खतरनाक घटनाओं के बढ़ने की साफ संभावना को दर्शाता है।

भारत के लिए क्यों है यह अहम?

तिब्बत में इस नदी को 'यारलुंग त्सांगपो' के नाम से जाना जाता है। यही नदी अरुणाचल प्रदेश में सियांग के रूप में भारत में प्रवेश करती है और आगे चलकर ब्रह्मपुत्र नदी का रूप ले लेती है। यह नदी पूर्वोत्तर भारत और बांग्लादेश के करोड़ों लोगों के लिए कृषि, आजीविका और वहां के इकोसिस्टम का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत है।

शोधकर्ताओं ने सलाह दी है कि जब भी जल-संसाधन विकास या भंडारण से जुड़े बुनियादी ढांचे की योजना बनाई जाए, या अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को पार करने वाली नदियों के जोखिमों का आकलन किया जाए, तो नदी के बहाव में होने वाले इन संभावित बदलावों को जरूर ध्यान में रखा जाना चाहिए।

'रनऑफ' क्या है?

रनऑफ (पानी का बहाव) जल चक्र की एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसमें अतिरिक्त पानी जमीन की सतह या मिट्टी के रास्ते बहकर नदियों और झीलों में पहुंच जाता है। यह तब होता है जब बारिश, बर्फ पिघलने या सिंचाई का पानी इतनी ज्यादा मात्रा में गिरता है कि जमीन उसे सोख नहीं पाती।

हालांकि सामान्य रनऑफ जल स्रोतों को भरने में मदद करता है, लेकिन अत्यधिक रनऑफ भारी तबाही ला सकता है। यह अपने साथ उर्वरक, कीटनाशक और अन्य खतरनाक रसायनों को बहाकर पानी के स्रोतों तक ले जाता है, जिससे इंसानी सेहत और वन्यजीवों को नुकसान पहुंचता है।

इसके अलावा, अत्यधिक रनऑफ से भयंकर बाढ़, मिट्टी का कटाव और संपत्ति की भारी बर्बादी होती है, खासकर उन शहरी इलाकों में जहां पक्की सड़कें पानी को जमीन के अंदर जाने से रोकती हैं।

विशाल बांध परियोजना से बढ़ता खतरा

तिब्बत में बनाई जा रही इस मेगा परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 168 अरब डॉलर है। इसमें पांच क्रमबद्ध जलविद्युत स्टेशन शामिल हैं। हालांकि इसका आधिकारिक मकसद बिजली पैदा करना है, लेकिन नदी के ऊपरी हिस्से में इतनी बड़ी परियोजना होने के कारण निचले इलाकों में पानी के बहाव, बाढ़ प्रबंधन और पर्यावरण पर पड़ने वाले असर को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

इस विशाल परियोजना से चीन के पास पानी छोड़ने के समय और मात्रा को नियंत्रित करने की शक्ति आ जाएगी।

वैज्ञानिकों की चिंताएं सिर्फ पानी के बहाव तक सीमित नहीं हैं। जुलाई में चीनी भूवैज्ञानिकों ने चेतावनी दी थी कि इस प्रस्तावित बांध के ठीक नीचे एक सक्रिय फॉल्ट लाइन मौजूद है, जो बांध की मजबूती और सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। उन्होंने इंजीनियरों से कमजोर ढलानों को मजबूत करने और भूस्खलन से बचाव के पुख्ता इंतजाम करने की अपील की थी।

हिमालयी क्षेत्र में प्राकृतिक आपदाओं का खतरा कितना भयानक हो सकता है, यह 26 अगस्त को चीन-नेपाल सीमा पर देखने को मिला था, जब वहां अचानक फ्लैश फ्लड आई थी। इस प्राकृतिक आपदा में नेपाल भारी नुकसान हुआ था और हजारों लोगों की मौत हुई थी।