[अरुण सिंह] भारत तेजी से तरक्की कर रहा है, लेकिन यह भी हकीकत है कि देश के कई हिस्से और तबके विकास की दौड़ में पीछे छूटे गए हैैं। पत्रकार शिरीष खरे की पुस्तक 'एक देश बारह दुनिया' हाशिये पर छूटे देश के इन्हीं हिस्सों और वंचित तबकों की तस्वीर पेश करती है।

12 यात्राओं पर आधारित इस पुस्तक में मिलेगा गांवों की त्रासदी पड़ताल

महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक और राजस्थान के विभिन्न हिस्सों की 12 यात्राओं पर आधारित रिपोर्ताज में शिरीष ने दूरदराज के गांवों की त्रासदी, उम्मीद और उथल-पुथल की परत-दर-परत पड़ताल की है।

'वह कल मर गया' शीर्षक के साथ कुपोषण की भयावह तस्वीर

ऐसे ही एक रिपोर्ताज में उन्होंने महाराष्ट्र के मेलघाट इलाके में कुपोषण की भयावह तस्वीर 'वह कल मर गया' शीर्षक के साथ पेश की है। मुंबई की बदनाम बस्ती कमाठीपुरा की यौन कर्मियों की बदहाल जिंदगी पर रौशनी डालने वाले रिपोर्ताज को उन्होंने 'पिंजरेनुमा कोठरियों में जिंदगी' शीर्षक दिया है। विशालकाय बांधों और तटों पर हो रहे अवैध खनन से कराहती नर्मदा का हाल भी उन्होंने बयां किया है।

पारधी जनजाति फैला रहा उजाला

महाराष्ट्र के उस्मानाबाद जिले के दुर्गम इलाके में स्थित महादेव बस्ती पर रिपोर्ताज 'सूरज को तोडऩे जाना है' उम्मीदें जगाने वाला है। इसमें उन्होंने बताया है कि पहचान के संकट से जूझ रही पारधी जनजाति की बस्ती में स्थित एक सरकारी स्कूल कैसे शिक्षा का उजाला फैला रहा है। विकास के विकल्पहीन संसार में यह स्कूल सूरज बनकर सामने आया है, जिसकी किरणें न केवल वंचित तबके के लोगों का जीवन बदल रही हैैं, बल्कि उनके मन में आत्मविश्वास और आत्मसम्मान की भावना भी भर रही हैैं।

हाशिये पर धकेले गए समुदायों पर आधारित पुस्तक

इस पुस्तक में ज्यादातर उन समुदायों के किस्से हैैं, जिन्हें कभी विकास, कभी आधुनिकता तो कभी परिवर्तन के नाम पर और अधिक हाशिये पर धकेल दिया गया। विभिन्न प्रदेशों के वंचित तबकों की जिंदगियों के किस्से हमारे सामने बिल्कुल ही अलग हिंदुस्तान को पेश करते हैैं। हिंदुस्तान जो स्थिर है, गतिहीन है और ठहरा हुआ है। हाशिये पर छूटे तबके के लोगों की समस्याओं, उनके दुख-दर्द को करीब से जानने के लिए यह अहम दस्तावेज है।

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पुस्तक : एक देश बारह दुनिया

लेखक : शिरीष खरे

मूल्य : 295 रुपये

प्रकाशक : राजपाल एंड संस

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Edited By: Pooja Singh